Uttar Pradesh: आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। रामपुर की MP-MLA मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों की रिहाई के आदेश जारी कर दिए हैं। कोर्ट ने आदेश की कॉपी जेल प्रशासन को भी भेज दी है। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम की 10 साल की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी थी। इसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ है।
Uttar Pradesh: जेल प्रशासन को भेजे गए रिहाई परवाने
उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘रामपुर के नवाब’ कहे जाने वाले समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और उनके पूर्व विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम खान की जेल से रिहाई की उलटी गिनती शुरू हो गई है। 29 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद, रामपुर की स्थानीय एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों के रिहाई आदेश जारी कर दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, शनिवार को आजम खान की ओर से 2.50 लाख रुपये जुर्माने की आधी रकम और जमानतियों के 1 लाख रुपये मिलाकर कुल 3.50 लाख रुपये जमा किए गए। वहीं, अब्दुल्ला आजम की तरफ से 2.75 लाख रुपये नकद जमा कराए गए। रकम जमा होने के बाद कोर्ट ने दोनों की रिहाई के आदेश रामपुर जिला जेल प्रशासन को भेज दिए। (Uttar Pradesh)
क्या था दो पैन कार्ड का मामला?
यह पूरा मामला साल 2019 में रामपुर के वर्तमान भाजपा विधायक आकाश सक्सेना द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग जन्मतिथियों वाले पैन कार्ड बनवाए और उनका गलत इस्तेमाल किया। पहले पैन कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 थी, जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु (25 वर्ष) पूरी करने के उद्देश्य से कथित तौर पर दूसरा पैन कार्ड बनवाया गया, जिसमें जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 दर्शाई गई थी। नवंबर 2025 में रामपुर की विशेष अदालत ने पिता-पुत्र को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का दोषी पाते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई थी। बाद में राज्य सरकार की अपील पर इसे बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया था।
हाईकोर्ट से मिली राहत और पेचीदगियां
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की जेल की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई है। इसका मतलब है कि उनकी सजा फिलहाल निलंबित है और वे जेल से बाहर आ सकते हैं, लेकिन चुनाव लड़ने से जुड़ी अयोग्यता बरकरार रहेगी। मामले की अंतिम सुनवाई जनवरी 2027 में तय की गई है, जिसमें कोर्ट इस मामले पर आगे फैसला करेगा। (Uttar Pradesh)
क्या तुरंत बाहर आ पाएंगे आजम खान?
रिहाई का आदेश जारी होने के बावजूद, आजम खान की राह में कुछ नई कानूनी अड़चनें अभी भी आ सकती हैं। आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ रामपुर और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में करीब 82 मामले दर्ज हैं। जेल से रिहाई के लिए इन मामलों में पहले मिली जमानतों की दोबारा जांच और पुष्टि जरूरी है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और तहसील स्तर पर जमानत देने वालों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। कई मामलों में यह प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को लेकर एक नया मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आजम खान को कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए वारंट की अर्जी दी है, जिस पर सोमवार (2 नवंबर) को सुनवाई होनी है। यदि जांच एजेंसियां किसी नए मामले में ‘बी-वारंट’ तामील कर देती हैं, तो रिहाई में फिर से देरी हो सकती है। (Uttar Pradesh)
आजम खान की रिहाई से सपा को राहत, समर्थकों में खुशी का माहौल
आजम खान समाजवादी पार्टी के सबसे कद्दावर मुस्लिम चेहरों में से एक रहे हैं। लगभग 11 महीनों से लगातार जेल में बंद रहने के बाद उनका बाहर आना उनके समर्थकों और पार्टी के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक बूस्ट है। रामपुर जेल के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ और गहमागहमी का माहौल इस बात का गवाह है। हालांकि, जब तक हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट उनकी दोषसिद्धि पर पूरी तरह रोक नहीं लगाता, तब तक तकनीकी और कानूनी रूप से आजम खान या उनके बेटे कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके साथ ही, शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना ने साफ किया है कि वे इस जमानत के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।
आजम खान और अब्दुल्ला आजम के लिए रिहाई के परवानों का जारी होना एक बड़ी कानूनी जीत है। हालांकि, मुकदमों की लंबी फेहरिस्त और जांच एजेंसियों की नई पैंतरेबाज़ी को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि वे कितने समय तक कानूनी राहत का आनंद ले पाते हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में दोबारा किस तरह सक्रिय होते हैं। (Uttar Pradesh)









