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Ram Mandir Donation Recovery: 80 करोड़पतियों का ‘सिंडिकेट’ और योगी सरकार का ‘रिकवरी एक्शन प्लान’; जानिए कैसे वापस आएगा भक्तों का एक-एक रुपया

Ram Mandir Donation Recovery

Ram Mandir Donation Recovery: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे की चोरी का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। दरअसल, इस पूरे मामले में अब कहानी सिर्फ यह नहीं रह गई है कि किसने कितना पैसा चुराया। बल्कि, असली सवाल अब यह है कि सरकार चोरी गया पैसा वापस कैसे लाएगी? पिछले कुछ दिनों में हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई से साफ दिख रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी पर नहीं, बल्कि पूरे पैसे की शत-प्रतिशत रिकवरी पर है। यही वजह है कि अब जांच सिर्फ शुरुआत में पकड़े गए 8 आरोपियों तक सीमित नहीं है। बल्कि, इसका दायरा उनके रिश्तेदारों, बैंक खातों, प्रॉपर्टी और जमीन की खरीद-फरोख्त तक पहुंच चुका है।

8 गिरफ्तारियों से शुरू हुआ खेल, अब 80 लोगों को SIT का नोटिस

शुरुआत में पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें मुख्य रूप से रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव (चंपत राय का पूर्व ड्राइवर), अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। पहले लगा कि यह मामला कुछ चंद लोगों की हेराफेरी तक ही सीमित है। हालांकि, जैसे-जैसे एसआईटी (SIT) ने जांच की परतें खोलीं, वैसे-वैसे एक बड़ा नेटवर्क सामने आने लगा। अब जांच एजेंसियां इस मामले में करीब 70 से 80 लोगों को नोटिस भेजकर पूछताछ कर रही हैं। इनमें बैंक कर्मचारी, सुरक्षा स्टाफ, नोडल अधिकारी और काउंटिंग टीम के कई दूसरे लोग भी शामिल हैं।

5 साल के बैंक रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस, 80 लाख का कैश बरामद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि भक्तों की आस्था के पैसे का एक-एक रुपया वापस लाया जाए। इसी लक्ष्य के साथ अब आरोपियों और उनके करीबियों की आर्थिक जांच (Financial Investigation) शुरू कर दी गई है।

  • बैंकों को नोटिस: पुलिस ने 7 अलग-अलग बैंकों से रिकॉर्ड मंगवाए हैं, जिसके तहत पिछले 5 साल के लेन-देन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
  • बरामदगी का गणित: अब तक की छापेमारी में पुलिस लगभग 79.85 लाख रुपये नकद बरामद कर चुकी है। इसके अलावा भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा, सोना और चांदी भी जब्त की गई है।
  • कहाँ से क्या मिला?: सबसे बड़ी रिकवरी अविनाश शुक्ला के लॉकर से हुई, जहाँ 20.39 लाख रुपये और 1121 अमेरिकी डॉलर मिले। इसके अलावा करुणेश पांडे से 18.07 लाख और अनुकल्प मिश्रा के पास से 16.82 लाख रुपये मिले हैं। वहीं, आरोपी लवकुश मिश्रा के लॉकर से 14.25 लाख रुपये बरामद किए गए।

[Image Suggestion: अयोध्या राम मंदिर के प्रशासनिक भवन और पुलिस द्वारा बरामद किए गए कैश व आभूषणों की सांकेतिक तस्वीर यहाँ लगाएं]

‘गोबर के ढेर’ से लेकर ‘स्टील के डिब्बे’ तक में छुपाया था पैसा

इस चोरी के मामले में आरोपियों ने पैसे छुपाने के लिए बेहद अजीबोगरीब तरीके अपनाए थे। जांच के दौरान आरोपी लवकुश मिश्रा के बारे में पता चला कि उसने चोरी की कुछ नकदी को गांव में गोबर के ढेर के नीचे छिपाकर रखा था। वहीं, चंपत राय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव के कमरे से एक स्टील के डिब्बे में 1 लाख रुपये कैश मिले। हालांकि, सुपरवाइजर सुभाष श्रीवास्तव के पास से कोई नकदी बरामद नहीं हुई है। लेकिन, निगरानी में बड़ी लापरवाही और कथित मिलीभगत के आरोप में उसे भी सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

प्रॉपर्टी कुर्की की तैयारी और ED की एंट्री से मंचा हड़कंप

एसआईटी को पक्का शक है कि चोरी की गई असली रकम बरामद की गई नकदी से कहीं ज्यादा हो सकती है। यही कारण है कि सरकार का दूसरा सबसे बड़ा फोकस अब आरोपियों की संपत्तियों की कुर्की (Property Attachment) पर है।

अवैध संपत्तियों की सूची तैयार: प्रशासन उन सभी जमीनों, मकानों, फार्महाउसों और लग्जरी गाड़ियों का रिकॉर्ड निकाल रहा है, जो आरोपियों की घोषित आय से मेल नहीं खातीं। उदाहरण के लिए, आरोपी अनुकल्प मिश्रा की करीब 65 लाख रुपये की बेनामी संपत्तियां और एक नई स्कॉर्पियो गाड़ी पहले ही जांच के दायरे में आ चुकी है।

इसके अलावा, इस मामले में मनी ट्रेल (Money Trail) की गहराई से जांच करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी संपर्क किया गया है। ईडी यह पता लगाएगी कि क्या चोरी के पैसों को किसी बड़े हवाला नेटवर्क या बेनामी जमीनों के जरिए बाजार में घुमाया गया है।

[Image Suggestion: आरोपियों के घर पर नोटिस चस्पा करती और संपत्तियों का ब्योरा खंगालती पुलिस टीम की तस्वीर यहाँ लगाएं]

SBI का इनपुट और CCTV से छेड़छाड़ की फॉरेंसिक जांच

इस पूरे मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का एंगल भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। जांच में सामने आया है कि बैंक ने कथित तौर पर इस गड़बड़ी को लेकर पहले ही आशंका जताई थी। अब उन बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जो कैश काउंटिंग की निगरानी से जुड़े थे। इसके साथ ही, डिजिटल सबूतों को जुटाने के लिए आईटी (IT) और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कैश काउंटिंग के दौरान सीसीटीवी (CCTV) कैमरों को जानबूझकर ढका गया था। इसलिए डिलीट किए गए फुटेज, मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स को दोबारा रिकवर किया जा रहा है।

निष्कर्ष: तीन स्तरों पर काम कर रहा है योगी सरकार का ‘एक्शन प्लान’

कुल मिलाकर देखें तो इस महा-घोटाले को उजागर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी को अतिरिक्त समय दिया है। सरकार का रिकवरी प्लान मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम कर रहा है: पहला, आरोपियों से सीधे कैश और कीमती आभूषणों की बरामदगी; दूसरा, उनकी अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कुर्क करना; और तीसरा, ईडी के जरिए पूरे मनी ट्रेल को ध्वस्त करना। अंततः, यह मामला अब सिर्फ एक सामान्य चोरी का केस नहीं रह गया है। बल्कि, यह एक ऐसा हाई-प्रोफाइल अभियान बन चुका है, जिसके जरिए सरकार आस्था के पैसे पर डाका डालने वाले पूरे सिस्टम को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है। Ram Mandir Donation Recovery

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