उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को लखनऊ से कानपुर तक की अपनी यात्रा ट्रेन से पूरी की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाओ और सादगी अपनाने की अपील के अनुपालन में राज्यपाल का यह कदम चर्चा का विषय बना हुआ है. राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहते हुए जनता के बीच इस तरह से सफर करना UP Governor Train Journey के तहत एक नई और सकारात्मक प्रशासनिक नजीर पेश करता है.
यह पहला मौका था जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश का कार्यभार संभालने के बाद किसी वीआईपी काफिले या लग्जरी गाड़ियों को छोड़कर आम यात्रियों की तरह रेल का सफर चुना. वह लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन से उत्सर्ग एक्सप्रेस की एसी प्रथम श्रेणी (First AC) बोगी में सवार होकर कानपुर के लिए रवाना हुईं. उनके इस औचक लेकिन बेहद अनुशासित सफर को लेकर लखनऊ और कानपुर दोनों ही स्टेशनों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे.
ऐशबाग स्टेशन पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम और UP Governor Train Journey 2026 की शुरुआत
राज्यपाल की इस ऐतिहासिक रेल यात्रा को लेकर राजभवन की ओर से पहले ही रेलवे प्रशासन को एक आधिकारिक पत्र भेजकर सूचित किया गया था. चूंकि यह सफर बेहद खास था, इसलिए रेलवे ने सुनिश्चित किया कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को स्टेशन पर किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े. इसके लिए सुबह आठ बजे की शिफ्ट में आने वाले सफाई और सुरक्षा कर्मचारियों को दो घंटे पहले यानी सुबह छह बजे ही ड्यूटी पर बुला लिया गया था.
तय कार्यक्रम के मुताबिक राज्यपाल का काफिला सुबह ठीक 7:23 बजे ऐशबाग स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंच गया था. इस दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और लखनऊ पुलिस के आला अधिकारी, जिनमें आईजी रेलवे और वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त शामिल थे, सुबह से ही मुस्तैद दिखे. UP Governor Train Journey की सुरक्षा व्यवस्था को इतनी बारीकी से डिजाइन किया गया था कि आम यात्रियों को भी किसी तरह की दिक्कत न हो.
सादगी की मिसाल: बैट्री कार छोड़कर पैदल चलीं राज्यपाल और सफर के बीच हुई चेन पुलिंग
स्टेशन पर राज्यपाल की बोगी एच-1 (H-1) ट्रेन के पिछले हिस्से में लगी हुई थी, जिसके कारण मुख्य द्वार के बजाय उन्हें साइड गेट से प्रवेश कराया गया. रेलवे प्रशासन ने प्लेटफार्म पर राज्यपाल की सुविधा के लिए एक विशेष बैट्री चालित कार का इंतजाम कर रखा था. लेकिन सादगी की मिसाल पेश करते हुए आनंदीबेन पटेल ने कार में बैठने से मना कर दिया और लगभग 100 मीटर की दूरी पैदल तय करके अपनी बोगी तक पहुंचीं.
जैसे ही उत्सर्ग एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर रवाना हुई और केवल पांच बोगियां ही आगे बढ़ी थीं, तभी अचानक किसी यात्री ने चेन पुलिंग कर दी. अचानक ट्रेन रुकने से प्लेटफार्म पर मौजूद अधिकारियों में हड़कंप मच गया और आरपीएफ व जीआरपी के जवान तुरंत उस बोगी की तरफ दौड़े. जांच में पता चला कि अपने बच्चों के साथ सफर कर रही एक महिला यात्री समय पर सोकर नहीं उठ पाई थी और स्टेशन छूटने के डर से उसने चेन पुलिंग कर दी थी.
कंट्रोल रूम की मुस्तैदी और UP Governor Train Journey 2026 का अगला पड़ाव
इस छोटी सी घटना के बाद ट्रेन को तुरंत कानपुर के लिए रवाना किया गया. राज्यपाल की इस पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और संचालन में कोई दूसरी बाधा न आए, इसके लिए उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल प्रशासन ने विशेष तैयारी की थी. रेलवे के ऑपरेटिंग अनुभाग के वरिष्ठ अधिकारी ट्रेन के कानपुर पहुंचने तक लगातार मुख्य कंट्रोल रूम में बैठकर पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहे थे.
निर्धारित समय पर उत्सर्ग एक्सप्रेस राज्यपाल को लेकर कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंची, जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया. तय कार्यक्रम के अनुसार राज्यपाल शुक्रवार को इसी ट्रेन से वापस लखनऊ लौटेंगी. इसके बाद उनका अगला सफर लखनऊ से प्रयागराज के बीच चलने वाली अत्याधुनिक वंदे भारत एक्सप्रेस से होगा, जिसे UP Governor Train Journey के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है.
एक राज्य के संवैधानिक मुखिया का आम जनता के साथ ट्रेन में सफर करना यह दिखाता है कि देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोग भी अब आम जीवन शैली को अपना रहे हैं. UP Governor Train Journey ने न केवल ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश दिया है, बल्कि वीआईपी कल्चर को खत्म करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम बढ़ाया है. आने वाले समय में अन्य जन प्रतिनिधियों के लिए भी यह यात्रा एक बड़ी प्रेरणा साबित होगी.









