बांग्लादेश में पिछले एक साल से हालत बद से बत्तर होते दिख रहे हैं। आपको याद होगा जब वहां पर प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार का तख्ता पलट हुआ था, उसके बाद से बांग्लादेश में आये दिन हिंसा देखने को मिलती हैं। शेख हसीना के जाने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में खटास आ गई हैं। हालांकि उसके बाद से वहां पर हिन्दू को टारगेट कर के उनको मौत के घाट उतारा जा रहा हैं। अगर अभी की बात करें तो 2 लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई है। कहा ये भी जा रहा है कि वहां के मौजूदा पीएम का पाकिस्तान से अच्छे रिश्ते हैं. जिसकी वजह से ऐसा हो रहा हैं।
वहीं अपने देश के अंदर SIR की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही व्यापक हिंसा के मद्देनजर बड़े पैमाने पर घुसपैठियों के भारत में घुसने की आशंका के चलते भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सीमा पर हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
जानिए अधिकारियों ने क्या कहा
इस पूरे मुद्दे पर अधिकारियों का यह भी कहना है कि चूंकि पड़ोसी देश की सुरक्षा एजेंसियां अपने यहां की स्थिति को नियंत्रित करने में बहुत व्यस्त हैं, आइएसआइ समर्थक संगठन भारत में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की साजिश रच रहे हैं। व्यवस्था ध्वस्त करने की स्पष्ट मंशा के साथ ये संगठन लाखों लोगों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने की फिराक में हैं।

खुफिया एजेंसियों का बयान आया सामने
खुफिया एजेंसियों का कहना है कि बंगाल में आगामी चुनाव के नजदीक होने से घुसपैठ कराने की पुरजोर कोशिश होगी। यह सावधान रहने का समय है। बंगाल में चुनाव के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने हिंसा की भी आशंका जताई है। आइएसआइ इस परिद्रश्य का फायदा उठाएगी और फिर उस समय बड़ी संख्या में घुसपैठियों को भारत में धकेलने की कोशिश करेगी।
क्या देश की सुरक्षा पर होगा सबसे बड़ा प्रहार
भारत की अखंडता और सुरक्षा पर अब तक का सबसे भीषण प्रहार होने वाला है। खुफिया एजेंसियों (IB और RAW) ने एक ऐसी भयावह साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसकी कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पड़ोसी देश की धरती का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने ‘ऑपरेशन बांग्लादेश’ को हरी झंडी दे दी है। इस साजिश का मकसद कोई आतंकी हमला नहीं, बल्कि लाखों घुसपैठियों को एक साथ भारतीय सीमा में धकेलकर देश के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करना है।
आपको बताते चलें कि खुफिया विभाग की गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, आईएसआई ने बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों में लाखों की संख्या में कट्टरपंथियों और घुसपैठियों को इकट्ठा किया है। योजना यह है कि कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की आड़ में इन लोगों को एक साथ पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा की सीमाओं से भारत के भीतर प्रवेश कराया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘डेमोग्राफिक युद्ध’ (Demographic War) के पीछे केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चीन की शह भी हो सकती है। उत्तर-पूर्व के राज्यों को भारत की मुख्य भूमि से काटने की साजिश अब नए और भयावह रूप में सामने आ रही है। “यह एक ‘साइलेंट वॉर’ है। बिना गोली चलाए भारत को भीतर से खोखला करने की यह अब तक की सबसे बड़ी और खतरनाक साजिश है। हमारे सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं, लेकिन खतरा अभूतपूर्व है।”

हिंसा के पीछे पाकिस्तान-जमात समर्थक
बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत के बाद पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी समर्थक कट्टरपंथियों ने जो हिंसा फैलाई है, उसके पीछे फरवरी में होने वाले चुनाव को टालने की सोची-समझी चाल है। एक्सपर्ट ने कहा है कि भारत को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, ताकि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की नाकामियों को छिपाया जा सके। क्योंकि, यह सरकार कानून और व्यवस्था को संभालने में पूरी तरह से फेल हो चुकी है, जो कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए पहली आवश्यकता है।

पूर्वोत्तर को अस्थिर करने की साजिश
बांग्लादेश पहले से भी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय उग्रवादी और अलगाववादी समूहों के लिए पनाहगाह, ट्रांजिट रूट और लॉजिस्टिक्स बेस के तौर पर काम करता रहा है। 1990 के दशक से 2000 की शुरुआत में स्थिति काफी गंभीर हो गई थी। इतना ही नहीं, बांग्लादेशस भारत से जुड़े इस्लामी चरमपंथी नेटवर्क का सुरक्षित पनाहगाह भी रहा है। हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी और बाद में जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश जैसे समूहों ने बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया। अब देखना होगा कि भारत का अगला कदम क्या होगा और बांग्लादेश में होने वाली साजिश से भारत आगे कैसै लड़ेगा, ये देखने वाली बात होगी।









