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Champat Rai Resigns: आस्था पर डाका डालने वालों पर गरजे सीएम योगी, SIT की रिपोर्ट के बाद 8 गिरफ्तार, अब ‘बड़ी मछलियों’ पर गिरी गाज।

Champat Rai Resigns

Champat Rai Resigns: अयोध्या राम मंदिर में रामभक्तों की आस्था और उनके चढ़ावे में सेंध लगाने वालों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई हुई है। देश-दुनिया के करोड़ों सनातनी जिस खबर की आशंका से सहमे हुए थे, आखिरकार उस पर सच्चाई की मुहर लग गई है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी और वित्तीय हेराफेरी के आरोपों के बीच ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

इसे राम मंदिर के इतिहास का सबसे बड़ा प्रशासनिक भूचाल माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती जांच में वित्तीय गड़बड़ियों और चढ़ावे के प्रबंधन में भारी लापरवाही के सबूत मिलने के बाद दोनों ने ‘नैतिकता’ का हवाला देते हुए पद छोड़ दिया है।

योगी आदित्यनाथ का ‘जीरो टॉलरेंस’: ‘आस्था से खिलवाड़ करने वाले सीधे पाताल जाएंगे’

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त और बेहद कड़ा रुख माना जा रहा है। जैसे ही राम मंदिर में करोड़ो रुपये के चढ़ावे में हेराफेरी (चोरी) का मामला सामने आया, सीएम योगी ने बिना समय गंवाए कड़े एक्शन के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी थी कि:

“रामभक्तों की आस्था और भगवान के चरणों में अर्पित धन पर बुरी नजर डालने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। आस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।”

योगी आदित्यनाथ के इसी कड़े रुख का नतीजा था कि लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई वाली 3 सदस्यीय SIT ने दिन-रात एक करके लगभग 150 लोगों के बयान दर्ज किए और जांच रिपोर्ट सीधे शासन को सौंप दी।

FIR, 8 गिरफ्तारियां और फिर सीधे इस्तीफे: कैसे खुली परत-दर-परत?

इस महाघोटाले की कहानी तब सार्वजनिक हुई जब ट्रस्ट के ही एक सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

 SIT का शिकंजा: SIT की शुरुआती रिपोर्ट आते ही पुलिस एक्शन में आई।

 8 ‘चोर’ गिरफ्तार: नोटों की गिनती और दानपात्र के प्रबंधन से जुड़े 8 आरोपियोंः रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष यादव को गिरफ्तार कर लिया गया।

 नैतिकता की दुहाई या मजबूरी?: जैसे ही इन ‘छोटी मछलियों’ पर शिकंजा कसा, आंच ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक पहुंच गई। विपक्ष लगातार ‘बड़ी मछलियों’ पर कार्रवाई की मांग कर रहा था। आखिरकार, शुक्रवार को चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे ने यह साफ कर दिया कि इस बार कार्रवाई का दायरा बहुत बड़ा है।

विपक्ष का हमला और सीएम योगी का करारा जवाब

इस मामले को लेकर सियासत भी चरम पर है। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसी विपक्षी पार्टियां लगातार ट्रस्ट को भंग करने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग कर रही थीं।

हालांकि, सीएम योगी ने विरोधियों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने देवरिया की एक जनसभा में गरजते हुए कहा कि जो लोग कभी राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, जो रामभक्तों पर गोलियां चलवाते थे, आज वे राजनीति चमकाने के लिए इस मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। उन्होंने साफ कहा, “अगर किसी के पास सबूत हैं तो राजनीति करने के बजाय सीधे SIT को सौंपे, जांच पूरी पारदर्शिता से होगी।”

अब आगे क्या?

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि मंदिर के दैनिक कामकाज और वित्तीय पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए अब एक पूर्णकालिक (Full-time) मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की जरूरत है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब ट्रस्ट के पुनर्गठन और राम मंदिर के चढ़ावे की गिनती के लिए डिजिटल और अभेद्य सुरक्षा प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है।

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र अयोध्या से आया यह फैसला यह साबित करता है कि सरकार और कानून के आगे कोई भी बड़ा नहीं है, चाहे वह राम मंदिर आंदोलन का कितना ही बड़ा चेहरा क्यों न रहा हो।

शिवेंद्र श्रीवास्तव- लखनऊ

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