Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर (Digital Services Tax – DST) लगाएगा, उसके अमेरिका भेजे जाने वाले सभी सामानों पर तत्काल 100% आयात शुल्क (Tariff) लगाया जाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह पोस्ट शेयर करते हुए मुख्य रूप से यूरोपीय देशों को निशाना बनाया है। यह चेतावनी अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आगामी 4 जुलाई की समयसीमा वाले एक बड़े व्यापार समझौते के ठीक पहले आई है।
Trump Tariff: Google, Meta, Amazon और Apple जैसी कंपनियों की सुरक्षा का मुद्दा
ट्रंप ने साफ किया है कि यह 100% टैरिफ पहले से किए गए या भविष्य में होने वाले किसी भी व्यापार समझौते को दरकिनार कर देगा। ट्रंप के मुताबिक कई यूरोपीय देश अमेरिकी दिग्गज कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाने की योजना को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं, जिसके तहत उन्होंने अमेरिकी तकनीकी कंपनियों (जैसे गूगल, मेटा, अमेज़न, और एप्पल) को विदेशी टैक्स से बचाने के लिए यह सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने साफ किया है कि डिजिटल सेवा कर (DST) लगाने वाले किसी भी देश के साथ किए गए सभी मौजूदा या भविष्य के व्यापार समझौते तुरंत प्रभाव से रद्द माने जाएंगे।
सोशल मीडिया पोस्ट में दी गई चेतावनी, समझौतों को भी बताया निरस्त
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “कई यूरोपीय देश अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर लागू करने पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें से कुछ देश इसे लागू करने के बहुत करीब हैं। कृपया इस बयान को इस बात का प्रतीक समझें कि जो भी देश ऐसा कर लगाएगा, उस पर संयुक्त राज्य अमेरिका को भेजे जाने वाले सभी सामानों पर तुरंत 100% टैरिफ लगाया जाएगा। यह टैरिफ उस देश के साथ किए गए व्यापार समझौतों को रद्द कर देगा, चाहे वे लागू किए गए हों, हस्ताक्षरित हों या नहीं। इसके अलावा, यदि वे ऐसा करते हैं, तो तुरंत 100% टैरिफ लागू किया जाएगा।” (Trump Tariff)
फ्रांस के 3% डिजिटल टैक्स पर लंबे समय से अमेरिकी आपत्ति
फ्रांस ने 2019 से ही बड़ी कंपनियों पर 3% डिजिटल टैक्स लागू कर रखा है, जिसका ट्रंप लगातार विरोध कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर भी 100% टैक्स लगाने की बात कही थी। हाल ही में यूके (UK) ने भी अपने डिजिटल टैक्स का बचाव किया था। इससे पहले कनाडा ने भी ऐसा ही एक डिजिटल टैक्स प्लान किया था, लेकिन अमेरिकी दबाव और ट्रंप द्वारा व्यापार वार्ता रोकने की धमकी के बाद उसने अपने कदम पीछे खींच लिए थे।
UK और अन्य देशों का डिजिटल टैक्स को लेकर बचाव जारी
वहीं, यूरोपीय देशों का तर्क है कि बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियां उनके देश के उपयोगकर्ताओं से भारी मुनाफा कमाती हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर बहुत कम कॉर्पोरेट टैक्स देती हैं। इस मिसअलाइनमेंट को ठीक करने के लिए डिजिटल टैक्स लाया गया है। जबकि अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ये टैक्स नीतियां जानबूझकर केवल अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने और उनके साथ भेदभाव करने के लिए तैयार की गई हैं। ट्रंप की नई धमकी का भारत पर असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि नई दिल्ली ने 2024 और 2025 में अपने कुछ डीएसटी शुल्क समाप्त कर दिए थे। व्हाइट हाउस के अनुसार, भारत अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार समझौते के तहत डीएसटी को पूरी तरह से हटा देगा। (Trump Tariff)
कनाडा ने अमेरिकी दबाव में पीछे हटाया अपना डिजिटल टैक्स प्लान
इस महीने की शुरुआत में, ट्रंप ने पेरिस द्वारा तकनीकी कंपनियों पर लगाए गए डिजिटल सेवा कर को हटाने के बदले में फ्रांसीसी शराब और शैंपेन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। फ्रांस ने 2019 में देश की सीमाओं के भीतर काम करने वाली प्रौद्योगिकी कंपनियों – जिनमें फेसबुक, अमेज़ॅन, एप्पल और गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट जैसी अमेरिकी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं – द्वारा अर्जित राजस्व पर तीन प्रतिशत कर लगाया था। ट्रंप के दबाव के बाद, कनाडा ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को बचाने के लिए पिछले साल अपने डिजिटल सेवा कर को समाप्त कर दिया था।
EU–US व्यापार समझौते के बीच नया विवाद
यह घोषणा ऐसे समय पर आई है, जब यूरोपीय संघ (EU) ने ठीक एक दिन पहले अमेरिका के साथ एक बड़े व्यापार समझौते (टर्नबेरी डील) को मंजूरी दी थी, जिसमें यूरोपीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 15% पर सीमित करना तय हुआ था। हालांकि, इस समझौते में डिजिटल टैक्स शामिल नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला सीधे तौर पर ग्लोबल ट्रेड वॉर (वैश्विक व्यापार युद्ध) को भड़का सकता है। हालांकि, कानूनी तौर पर इतनी जल्दी 100% टैरिफ लागू करना अमेरिकी प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहले भी राष्ट्रपति के कुछ आपातकालीन टैरिफ अधिकारों पर रोक लगा चुका है। (Trump Tariff)









