Azam Khan: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान को रामपुर जेल से रिहा होते ही अपनी हिरासत में ले लिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद शनिवार को आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हुआ था। लेकिन जेल के मुख्य द्वार से बाहर कदम रखते ही केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) ने उन्हें एक अन्य मामले में हिरासत में ले लिया। जहां एक तरफ आजम खान को ईडी की टीम अपने साथ ले गई, वहीं उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान जेल से रिहा होकर अपने घर रवाना हो गए।
Azam Khan: हाई-वोल्टेज ड्रामा- 50 जवान, 15 गाड़ियां और समर्थकों का हंगामा
शनिवार दोपहर से ही रामपुर जिला कारागार के बाहर आजम खान के समर्थकों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा था। वकील सभी कानूनी औपचारिकताओं और जमानती बांड के सत्यापन को पूरा कर रिहाई का परवाना जेल प्रशासन को सौंप चुके थे। शाम को जैसे ही रिहाई का समय नजदीक आया, अचानक गाजियाबाद और लखनऊ नंबरों वाली गाड़ियों से ईडी के अधिकारी पैरामिलिट्री फोर्स के साथ जेल परिसर पहुंचे।
जेल के बाहर सीआरपीएफ (CRPF) के करीब 50 जवान तैनात किए गए थे और ईडी की टीम करीब 15 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंची थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जेल के गेट पर ईडी अधिकारियों और आजम खान (Azam Khan) के बीच काफी देर तक बहस भी हुई। आजम खान को हिरासत में लिए जाने से नाराज सपा कार्यकर्ताओं ने सरकार और जांच एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी और हंगामा किया।
Azam Khan का भावुक बयान: “क्या मुसलमान होने की यही सजा है?”
जेल से बाहर आते ही जब ईडी ने उन्हें अपनी गाड़ी में बिठाया, तो आजम खान मीडिया को देखकर काफी भावुक हो गए। उन्होंने बेहद तल्ख और दुखी लहजे में कहा, “अब कहने के लिए बचा ही क्या है? मैं क्या कहूं? कानून तो जैसे पूरी तरह खत्म ही हो गया है। क्या एक मुसलमान होने की यही सजा है? हमारा गुनाह सिर्फ इतना है कि एक मुसलमान ने एक बड़ी यूनिवर्सिटी (जौहर यूनिवर्सिटी) खड़ी कर दी।”
किस मामले में हुई यह कार्रवाई?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दो पैन कार्ड और फर्जी पासपोर्ट से जुड़े जालसाजी के मामले में आजम खान (Azam Khan) और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की 7-7 साल की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दे दी थी। दोनों नेता 17 नवंबर 2025 से ही इस मामले में रामपुर जेल में बंद थे। सभी मुकदमों में जमानत मिलने के बाद उनकी पूरी रिहाई तय मानी जा रही थी, लेकिन ईडी ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) मामले में नया वारंट तामील कर उन्हें हिरासत में ले लिया।
आरोप है कि आजम खान ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर सरकारी ठेकों के पैसे को निजी ठेकेदारों के माध्यम से जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की संपत्तियां बनाने में डायवर्ट किया। हाल ही में 13 अक्टूबर 2026 को ईडी की शिकायत पर रामपुर के अजीम नगर थाने में आजम खान, जौहर ट्रस्ट और तीन अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन की नई एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी। रामपुर पुलिस और ईडी पहले से ही कोर्ट में आजम खान की कस्टडी रिमांड की अर्जी दाखिल कर चुके थे, जिस पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
यूपी चुनाव 2027 और सियासी मायने
रामपुर सदर सीट से 10 बार विधायक, अखिलेश यादव सरकार में कद्दावर कैबिनेट मंत्री और रामपुर से सांसद रह चुके आजम खान (Azam Khan) समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरों में से एक हैं। 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनका जेल से बाहर आना सूबे की सियासत के लिए बेहद अहम माना जा रहा था। यही वजह थी कि करीब 9 दिन पहले 22 अक्टूबर को खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रामपुर जेल जाकर उनसे मुलाकात की थी।
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