अमेठी की सुरक्षित सीट जगदीशपुर में विकास की बातों के बीच अचानक सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की एक ऐसी आंधी उठी है। जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति को हिला दिया है। बीजेपी विधायक सुरेश पासी ने कैमरे के सामने वह कह दिया जिसे अक्सर नेता पर्दे के पीछे भी कहने से कतराते हैं। उन्होंने न केवल मुस्लिम वोट की अनिच्छा जताई, बल्कि सामाजिक रिश्तों को भी ‘जीने-मरने’ के स्तर तक नकार दिया। अब सवाल यह है कि क्या यह 2027 की तैयारी है या पार्टी की लाइन से हटकर दिया गया कोई व्यक्तिगत दुस्साहस?

उत्तर प्रदेश के अमेठी से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सुरेश पासी (Suresh Pasi) ने एक बेहद विवादित बयान देकर प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। जगदीशपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट से दूसरी बार के विधायक पासी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें “मुस्लिमों के वोट की जरूरत नहीं है” और वह कभी उनके घर या मस्जिद नहीं जाएंगे।
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सुरेश पासी ने कहा कि मुसलमानों के वोट पर निर्भर नहीं
विधायक सुरेश पासी ने कैमरे के सामने यह भी कहा कि उन्हें मुसलमानों के वोट नहीं चाहिए और इसी सोच के साथ वह राजनीति कर रहे हैं। सुरेश पासी ने कहा, “मुझे मुसलमानों के वोट की जरूरत नहीं है। मैं न कभी मस्जिद गया हूँ और न कभी जाऊँगा। मैं उनके यहाँ वोट माँगने भी नहीं जाता।” इतना ही नहीं, उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि वह उनके सुख-दुख या किसी सामाजिक कार्यक्रम में भी शामिल नहीं होते।
सुरेश पासी जगदीशपुर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक हैं। उनके इस बयान के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्षी दलों द्वारा इसकी आलोचना की जा सकती है, हालांकि भाजपा संगठन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।

बीजेपी का बचाव: बीजेपी के स्थानीय नेतृत्व ने इसे सुरेश पासी की ‘निजी राय’ बताया है। अमेठी के बीजेपी जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पार्टी ‘सबका विश्वास’ की नीति पर चलती है और विधायक का बयान पार्टी की आधिकारिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करता।









