समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा हमला बोला है। 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के अवसर पर लखनऊ में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने ‘संघ परिवार’ को लेकर अब तक का सबसे तीखा बयान दिया।

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनावों की तपिश अभी से महसूस होने लगी है। मकर संक्रांति के मौके पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ‘संघ परिवार’ पर हमला करते हुए उन्हें “दुनिया का सबसे खतरनाक परिवार” करार देकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की आरएसएस मुख्यालय में कथित मुलाकात को ढाल बनाकर अखिलेश ने भाजपा के राष्ट्रवाद और स्वदेशी के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग कल तक चीनी सामानों के बहिष्कार का नारा दे रहे थे, वे आज गुपचुप तरीके से ‘एकदलीय व्यवस्था’ की मास्टर क्लास ले रहे हैं।
चीनी प्रतिनिधिमंडल की आरएसएस से मुलाकात: अखिलेश यादव ने तंज कसा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के नेताओं ने आरएसएस के दफ्तर जाकर मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी और उसके सहयोगी ‘स्वदेशी’ का नारा देते-देते अब पूरी तरह ‘परदेसी’ हो गए हैं।
एकदलीय व्यवस्था का आरोप: सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ पड़ोसी देश (चीन) से भारत में भी एकदलीय राजनीतिक व्यवस्था लागू करने का प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।

रंगे सियार की कहानी का जिक्र: उन्होंने भाजपा समर्थकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे आज ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। अखिलेश ने इसे ‘रंगे सियार’ की कहानी बताया, जिसका असली रंग बारिश (सच्चाई सामने आने) पर उतर जाता है।
घुसपैठियों पर डेटा का दावा: अखिलेश ने कहा कि भाजपा ने ‘घुसपैठियों’ का झूठा डर दिखाकर नरेटिव बनाया, जबकि ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया में एक भी घुसपैठिया नहीं मिला।
संविधान और लोकतंत्र का हवाला: उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए भाजपा को सत्ता से बाहर करना अनिवार्य है, क्योंकि यह “परिवार” (संघ) पारदर्शी नहीं है और कागजों पर इसका कोई पंजीकरण तक नहीं है।

अखिलेश यादव का यह हमला साफ संकेत देता है कि समाजवादी पार्टी अब ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ या केवल विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह सीधे संघ की विचारधारा और भाजपा के राष्ट्रवाद को चुनौती देगी। कार्यकर्ताओं को 2027 के लिए “बूथ जिताने” का मंत्र देते हुए अखिलेश ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) बनाम ‘संघ’ की जंग और भी आक्रामक होने वाली है।









