Allahabad High Court: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के बरेली में 1985 के एक 39 साल पुराने बलात्कार मामले में आरोपी हबीब की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। हालांकि, अदालत ने उसकी 8 साल की सजा को घटाकर पहले से ही जेल में बिताई गई अवधि (लगभग 7 साल) तक सीमित कर दिया है। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने आरोपी हबीब द्वारा दायर अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसने इस मामले में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी थी।
Allahabad High Court: क्या है पूरा मामला?
यह घटना 26 अक्टूबर 1985 को बरेली के एक गांव में हुई थी। आरोपी हबीब ने सरसों के पत्ते इकट्ठा कर रही 9 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार किया था। बच्ची के चिल्लाने पर ग्रामीण वहां पहुंचे, जिसके बाद आरोपी मौके से भाग गया था। बाद में पीड़िता के कपड़ों पर खून के धब्बे मिले और पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए 8 साल के कड़े कारावास की सजा सुनाई थी।
‘हर बलात्कार में बाहरी चोट जरूरी नहीं’, हाईकोर्ट ने अपील पर सुनाया अहम फैसला
जस्टिस तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने आरोपी की अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने साफ किया कि हर बलात्कार मामले में बाहरी चोटें होना अनिवार्य नहीं है। फॉरेंसिक रिपोर्ट न होने या जांच में कमियों के आधार पर पूरे मामले को खारिज नहीं किया जा सकता। पीड़िता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट में हाइमन फटने और ताजी चोट के निशान इस अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त थे। (Allahabad High Court)
उम्र और लंबी कानूनी प्रक्रिया के आधार पर सजा कम
सजा में बदलाव का कारण आरोपी हबीब पहले ही अपनी 8 साल की सजा में से लगभग 7 साल जेल में काट चुका है। उसकी बढ़ती उम्र और लंबी कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने सजा को उसके द्वारा पहले से ही भुगती गई अवधि तक सीमित कर दिया और उसे रिहा करने का आदेश दिया। (Allahabad High Court)









