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गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, दाखिल की अग्रिम जमानत याचिका

Avimukteshwaranand Case

Avimukteshwaranand Case: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न और POCSO मामले में अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। यह मामला प्रयागराज की एक विशेष अदालत के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के आधार पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।

Avimukteshwaranand Case: POCSO और BNS की गंभीर धाराएं

अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश की कानूनी टीम ने यह याचिका गिरफ्तारी से बचने के लिए दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जल्द सुनवाई की मांग की है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) और POCSO अधिनियम की विभिन्न धाराएं (जैसे 3, 4(2), 5(l), 6, 16 और 17) शामिल हैं।

यह मामला शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य) की शिकायत पर दर्ज हुआ है। आरोप है कि स्वामी और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी ने माघ मेले और गुरुकुल में नाबालिगों का यौन शोषण किया। (Avimukteshwaranand Case)

 ‘गौ-रक्षा अभियान को दबाने की साजिश’: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को ‘साजिश’ बताया है और इसे अपने गौरक्षा अभियान के खिलाफ एक दबाव की रणनीति करार दिया है। उन्होंने कहा है कि वे पुलिस जांच में सहयोग करेंगे और उन्हें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है।

इस बीच, सोमवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने खिलाफ POCSO अधिनियम के तहत दर्ज मामले को सरकार द्वारा गायों की हत्या पर प्रतिबंध की मांग से ध्यान हटाने की एक ‘चाल’ करार दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर शंकराचार्यों पर ‘हमला’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने आगे कहा कि कथित POCSO मामले में अन्य आरोपियों का उनके गुरुकुल से कोई संबंध नहीं है। (Avimukteshwaranand Case)

धार्मिक नेता ने कहा कि हम समय-समय पर जनता से मिलते हैं। यह सरकार चाहती है कि हम ही धार्मिक नेता और सरकार दोनों बनें। देश में चार शंकराचार्य हैं, जिन्होंने हमेशा सनातन धर्म की रक्षा की है। अब उन्होंने उन पर हमला करना शुरू कर दिया है। सत्य कभी नष्ट नहीं होता; वह हमेशा बना रहता है। गौहत्या पर प्रतिबंध के लिए आवाज उठाई गई है, और हम इस आवाज को और भी बुलंद करते रहेंगे। ये लोग जनता का ध्यान किसी और चीज की ओर भटकाना चाहते हैं।

पुलिस जांच में सहयोग का वादा

इससे पहले, उत्तर प्रदेश पुलिस कथित यौन उत्पीड़न के मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गिरफ्तार करने के लिए उनके आवास पर पहुंची। मीडियाकर्मियों से बात करते हुए स्वामी ने कहा कि वे पुलिस का किसी भी तरह से विरोध नहीं करेंगे और उनके साथ सहयोग करेंगे। (Avimukteshwaranand Case)

दूसरी ओर, पिछले सप्ताह शनिवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण न्यायालय ने ज्योतिष पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। यह आदेश धार्मिक नेता पर नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों के बाद जारी किया गया।

अदालत के आदेश के बाद अब झूसी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया जाएगा। शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने धारा 173 (4) के तहत शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें एफआईआर दर्ज करने और मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। (Avimukteshwaranand Case)

13 फरवरी को, दो नाबालिग शिकायतकर्ताओं के बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से अदालत में दर्ज किए गए और अदालत ने पुलिस रिपोर्ट का औपचारिक संज्ञान लिया। इन बयानों को दर्ज करने और रिपोर्ट पर विचार करने के बाद, अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।


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