Bihar Politics: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के दौरान उनके कार्यकाल की जमकर प्रशंसा की। शाह ने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री के रूप में बिताए समय को बिहार के इतिहास में एक “स्वर्ण अध्याय” बताया।
अमित शाह ने कहा कि नीतीश कुमार एक लंबे अंतराल के बाद फिर से दिल्ली लौट रहे हैं और एनडीए के सभी साथी राष्ट्रीय राजनीति में उनकी इस वापसी का हृदय से स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही, लंबे अंतराल के बाद वे राज्यसभा सांसद के रूप में एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करेंगे। (Bihar Politics)

Bihar Politics: बेदाग छवि और सादगी की मिसाल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार 2005 से अब तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनका कार्यकाल वास्तव में गौरवशाली रहा। यह कार्यकाल बिहार के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में लिखा जाएगा, जिसने बिहार के विकास के सभी पहलुओं को आकार दिया। विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने लंबे करियर में उनका कुर्ता कभी कलंकित नहीं हुआ। उनका पूरा जीवन भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त रहा।
शाह ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 11 वर्षों तक उन्होंने बिहार की प्रगति में हर तरह से महत्वपूर्ण योगदान दिया, और उन्हीं के नेतृत्व में प्रधानमंत्री मोदी की सभी पहलें बिहार की जनता तक पहुंचीं। वे एक बार फिर राज्यसभा सांसद के रूप में दिल्ली लौट रहे हैं। मैं और हमारे सभी एनडीए सहयोगी उनका हार्दिक स्वागत करते हैं, और मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल बिहार की जनता द्वारा हमेशा याद रखा जाएगा और सम्मान दिया जाएगा। (Bihar Politics)
नामांकन के दौरान एकजुट दिखा एनडीए कुनबा
यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिला है, जिसमें मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना से राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ अमित शाह के अलावा अन्य एनडीए उम्मीदवार जैसे भाजपा के नितिन नबीन, शिवेश कुमार, आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा और जदयू के रामनाथ ठाकुर भी मौजूद थे। (Bihar Politics)

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के इस कदम को बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। उनके इस्तीफे के बाद बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार बनने की प्रबल संभावना है, जो राज्य के इतिहास में पहली बार होगा। दूसरी ओर, राजद नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस ने इसे जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात और नेतृत्व तख्तापलट करार दिया है।









