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दिल्ली आबकारी केस में CBI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए तीन कैविएट, AAP नेताओं की याचिका पर सुनवाई से पहले अपना पक्ष रखने की मांग की

Delhi Excise Policy Case

Delhi Excise Policy Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य AAP नेताओं की विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) के जवाब में सर्वोच्च न्यायालय में तीन कैविएट दायर की हैं। यह कदम AAP नेताओं द्वारा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पर सवाल उठाने और मामला स्थानांतरित करने की मांग के बाद उठाया गया है, जिसे मुख्य न्यायाधीश ने प्रशासनिक स्तर पर खारिज कर दिया था। 

Delhi Excise Policy Case: AAP नेताओं की SLP में उठाए गए मुख्य सवाल

सीबीआई सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी आदेश पारित करने से पहले उनका पक्ष सुना जाए, क्योंकि वे उच्च न्यायालय के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दे रहे हैं। इस प्रकार की याचिकाएं आमतौर पर तब दायर की जाती हैं, जब कोई पक्ष किसी मामले की तत्काल सुनवाई की आशंका रखता है और अंतरिम निर्देश जारी होने से पहले अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त करना चाहता है।

मिली जानकारी के अनुसार, एजेंसी द्वारा तीन अलग-अलग आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। फिलहाल, केजरीवाल और अन्य द्वारा दायर की गई SLP सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर दोषपूर्ण के रूप में दिखाई दे रही हैं, जिसका अर्थ है कि मामले को औपचारिक रूप से सूचीबद्ध किए जाने से पहले कुछ प्रक्रियात्मक अनुपालन अभी बाकी हैं। (Delhi Excise Policy Case)

हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक: मामला ट्रांसफर करने की मांग क्यों?

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर अपनी याचिकाओं में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ से कार्यवाही को स्थानांतरित करने की मांग की है। इस याचिका में न्यायाधीश द्वारा पिछली सुनवाईयों के दौरान, विशेष रूप से उत्पाद शुल्क नीति मामले से जुड़े जमानत मामलों में, कथित तौर पर की गई कुछ टिप्पणियों और विचारों पर चिंता व्यक्त की गई है। (Delhi Excise Policy Case)

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पिछली कार्यवाही में की गई प्रथम दृष्टया एकतरफा टिप्पणियों से भविष्य की सुनवाई की निष्पक्षता के बारे में उचित आशंका उत्पन्न होती है। उन्होंने हाल ही में हुए एक घटनाक्रम का भी जिक्र किया है, जिसमें एक न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की अपील की सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय द्वारा प्रशासनिक आधार पर मामले को स्थानांतरित करने से इनकार करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का निर्णय लिया गया है। अपने पत्र में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामला रोस्टर के अनुसार आवंटित किया गया था और इसे स्थानांतरित करने का कोई आधार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि मामले से खुद को अलग करने का निर्णय संबंधित न्यायाधीश पर निर्भर करता है। (Delhi Excise Policy Case)

दिल्ली आबकारी नीति केस

दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति का मामला निरस्त हो चुकी उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 में कथित अनियमितताओं से संबंधित है और इसकी जांच CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है। केजरीवाल और सिसोदिया सहित कई आम आदमी पार्टी के नेताओं को आरोपी बनाया गया है। CBI द्वारा आपत्ति दर्ज कराने और याचिकाओं में अभी तक खामियों को दूर न किए जाने के कारण, प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उठाए जाने की उम्मीद है। (Delhi Excise Policy Case)


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