Election Results 2026: आज 4 मई 2026 की सुबह जब देशभर के पांच राज्यों में ईवीएम के पिटारे खुलेंगे, तो वह केवल सत्ता के हस्तांतरण का दिन नहीं होगा, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की नई दिशा का घोषणापत्र होगा। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी। इन पांच राज्यों की 824 सीटों पर हुए मतदान के नतीजे आज यह तय करेंगे कि क्षेत्रीय क्षत्रपों का जादू बरकरार है या भारतीय जनता पार्टी का ‘दक्षिण और पूर्व’ विजय अभियान एक नए शिखर पर पहुंच गया है।
Election Results 2026: पढिए इन पांच राज्यों के चुनावी महासंग्राम का सबसे विस्तृत और सटीक विश्लेषण:
- पश्चिम बंगाल: ‘दीदी’ का किला या ‘दादा’ का दखल?
बंगाल इस बार भी चुनाव के केंद्र में है। 294 सीटों वाली विधानसभा (गिनती 293 सीटों पर) के लिए इस बार रिकॉर्ड 92.5% मतदान हुआ है, जो अपने आप में एक संदेश है।
- मुख्य समीकरण: इस चुनाव का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट चुनाव आयोग का Special Intensive Revision (SIR) रहा, जिसके तहत 91 लाख ‘फर्जी’ वोटरों के नाम काटे गए। बीजेपी इसे अपनी बड़ी जीत मान रही है, जबकि टीएमसी ने इसे केंद्र की साजिश करार दिया है।
- आरजी कर (RG Kar) फैक्टर: 2024 की उस काली घटना की परछाई इस चुनाव पर साफ दिखी। बीजेपी ने पीड़िता की मां को पानीहाटी से चुनावी मैदान में उतारकर ‘महिला सुरक्षा’ को सबसे बड़ा हथियार बनाया है।
- बीजेपी की स्थिति: एग्जिट पोल्स में बीजेपी को बढ़त दिखाई गई है। पीएम मोदी और अमित शाह ने बंगाल में हफ्तों तक डेरा डाला, जिसका असर उत्तर बंगाल और मतुआ बहुल सीटों पर दिख सकता है।
- टीएमसी का दांव: ममता बनर्जी ने अपनी कल्याणकारी योजनाओं (लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री) और ‘बंगाल की बेटी’ वाली छवि पर भरोसा जताया है।
- तमिलनाडु: द्रविड़ राजनीति में ‘विजय’ की एंट्री?
तमिलनाडु में इस बार मुकाबला केवल DMK (एम.के. स्टालिन) और AIADMK (ई. पलानीस्वामी) के बीच नहीं है।
- नया प्लेयर: सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK के आने से राज्य में त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। विजय ने पेराम्बुर और त्रिची जैसे इलाकों में युवा वोटरों को अपनी ओर खींचा है, जिससे पारंपरिक द्रविड़ दलों के समीकरण बिगड़ सकते हैं।
- बीजेपी की रणनीति: बीजेपी ने अन्नामलाई के नेतृत्व में द्रविड़ विचारधारा के मुकाबले ‘सांस्कृतिक गौरव’ को आगे रखा है। क्या वे इस बार दहाई का आंकड़ा छू पाएंगे? यह आज साफ होगा।
- केरल: क्या टूटेगा बारी-बारी का रिवाज?
केरल में आमतौर पर सत्ता हर पांच साल में बदलती है (LDF बनाम UDF), लेकिन 2021 में पिनाराई विजयन ने इस परंपरा को तोड़कर इतिहास रचा था।
- LDF (वामपंथ): मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन तीसरी बार सत्ता वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। उनके पास अपना मजबूत कैडर और सरकारी जनकल्याणकारी नीतियां हैं।
- UDF (कांग्रेस गठबंधन): कांग्रेस ने बेरोजगारी और भ्रष्टाचार (सहकारी बैंक घोटाला) को मुद्दा बनाकर सत्ता विरोधी लहर को भुनाने की कोशिश की है।
- बीजेपी की स्थिति: बीजेपी ने मेट्रों मैन ई. श्रीधरन और राजीव चंद्रशेखर जैसे चेहरों के माध्यम से केरल में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाई है। त्रिशूर और तिरुवनंतपुरम की सीटों पर कड़ा मुकाबला है।
- असम: हिमंत बिस्वा सरमा का ‘अजेय’ रथ?
असम में 126 सीटों के लिए हुआ मतदान बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है।
- समीकरण: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव को ‘सभ्यता’ और ‘पहचान’ की लड़ाई बना दिया है। परिसीमन (Delimitation) के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलने की उम्मीद है।
- विपक्ष: कांग्रेस ने गौरव गोगोई के नेतृत्व में स्थानीय मुद्दों और सीएए (CAA) विरोध को हवा दी है, लेकिन सरमा की विकास योजनाओं के सामने विपक्ष थोड़ा कमजोर दिख रहा है।
- पुडुचेरी: एनडीए बनाम इंडिया ब्लॉक
30 सीटों वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी (AINRC) और बीजेपी का गठबंधन अपनी सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। यहाँ मुकाबला काफी करीबी है और निर्दलीय उम्मीदवार किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।
महागणना से पहले के महा इंतज़ाम
- सुरक्षा व्यवस्था: बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में हिंसा की शिकायतों के बाद वहां 21 मई को दोबारा चुनाव कराए जाएंगे, बाकी 293 सीटों की गिनती आज जारी है।
- शुरुआती संकेत: शुरुआती डाक मतपत्रों (Postal Ballots) की गिनती में बंगाल में काँटे की टक्कर दिख रही है, जबकि असम में बीजेपी आगे निकलती नजर आ रही है।
- स्टॉक मार्केट की नजर: इन चुनावी नतीजों का असर आज शेयर बाजार पर भी दिखेगा। अगर बीजेपी बंगाल में बड़ी बढ़त बनाती है, तो बाजार में बड़ी तेजी की संभावना है।
आज शाम तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि भारत की राजनीति में ‘राष्ट्रवाद’ का डंका बज रहा है या ‘क्षेत्रीय अस्मिता’ ने अपनी जमीन बचा ली है। बंगाल के नतीजे विशेष रूप से 2029 की चुनावी बिसात बिछाएंगे।









