विश्व कैंसर दिवस के विशेष अवसर पर लखनऊ स्थित उर्दू अकादमी में “जर्नलिस्ट मीडिया प्रेस एसोसिएशन” के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति सचेत करना और इसके रोकथाम के प्रभावी उपायों पर विस्तृत चर्चा करना था। इस गरिमापूर्ण मौके पर “आशा की किरण” नामक स्मारिका का भी विमोचन किया गया, जो कैंसर पीड़ितों के लिए एक प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत की गई है। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों, वरिष्ठ पत्रकारों, समाजसेवियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि और कल्याण सिंह कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. एम.एल.बी. भट्ट ने अपने संबोधन में बताया कि कैंसर अब एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि तम्बाकू का सेवन 40% से अधिक कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार है, जबकि लीवर कैंसर के पीछे शराब का अत्यधिक उपभोग मुख्य कारण है। डॉ. भट्ट ने सुझाव दिया कि नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, सूर्य की रोशनी का सेवन और तनाव मुक्त जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के प्रसार को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके साथ ही खान-पान में ताजे फल, हरी सब्जियां और मोटे अनाज को शामिल करना कैंसर के रोकथाम में एक कारगर उपाय साबित हो सकता है।
चिकित्सीय दृष्टिकोण को साझा करते हुए डॉ. राहत हादी और डॉ. निर्मला पंत ने नियमित जांच की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि शरीर में किसी भी प्रकार के असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। विशेषकर महिलाओं के लिए समय-समय पर स्वयं स्तन परीक्षण करना और वर्ष में कम से कम एक बार पूरे शरीर की जांच कराना अनिवार्य बताया गया। वहीं ओरल कैंसर विशेषज्ञों डॉ. स्वाति प्रसाद और डॉ. शैली महाजन ने आगाह किया कि मुंह के कैंसर को केवल एक शारीरिक व्याधि के रूप में नहीं देखना चाहिए, क्योंकि यह व्यक्ति के आत्मसम्मान को भी गंभीर चोट पहुँचाता है।
संगोष्ठी में चिकित्सा के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया गया। पूर्व आई.ए.एस. अब्दुल समद ने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि हर वर्ष लगभग एक करोड़ लोग इस बीमारी के कारण अपना जीवन खो देते हैं, ऐसे में पीड़ितों को दवाओं के साथ-साथ नैतिक और मानसिक समर्थन की सख्त जरूरत होती है। डॉ. प्रीती श्रीवास्तव, मनोज शेखर और सूर्य कुमार पांडेय जैसे विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि प्लास्टिक का कम उपयोग और उच्च मनोबल इस लड़ाई में जीत दिलाने के लिए बेहद जरूरी हैं। कार्यक्रम के अंत में जर्नलिस्ट मीडिया प्रेस एसोसिएशन द्वारा सभी चिकित्सकों और विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। श्री उमाशंकर पाण्डेय के संयोजन और श्री अश्वन वर्मा के सफल संचालन के बीच राष्ट्रगान के साथ इस संगोष्ठी का समापन हुआ।









