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Karnataka: “मोदी सरकार ने ग्रामीण शक्ति को कमजोर”, CM सिद्धारमैया ने VB G RAM G बिल को लेकर केंद्र सरकार पर बोला हमला

Karnataka

Karnataka: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने वीबी जी राम जी अधिनियम को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि वीबी जी राम जी बिल ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को कमजोर करके ग्राम-स्तरीय शासन को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है।

Karnataka के मुख्यमंत्री का केंद्र पर हमला

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने राज्य सरकारों से परामर्श किए बिना मौजूदा MGNREGA ढांचे को प्रभावी रूप से वापस लेकर एक नया कानून पेश किया है, जो एक तानाशाही रवैया दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने रोजगार का अधिकार, सूचना का अधिकार और शिक्षा का अधिकार जैसे ऐतिहासिक कानूनों के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नया कानून 17 दिसंबर को संसद में पेश किया गया और अगले ही दिन बिना पर्याप्त चर्चा के पारित कर दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि देशभर में लगभग 12.16 करोड़ श्रमिक NREGA पर निर्भर हैं, जिनमें से 6.21 करोड़ महिलाएं हैं, लगभग 17% अनुसूचित जाति से और 11% अनुसूचित जनजाति से हैं। अकेले कर्नाटक में ही 71.18 लाख NREGA श्रमिक हैं, जिनमें 36.75 लाख महिलाएं शामिल हैं, जो कुल कार्यबल का 51.6% हैं। (Karnataka)

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार कॉरपोरेट हितों को लाभ पहुंचाने के लिए जनहितैषी कानूनों को खत्म कर रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पूर्ववर्ती अधिनियम के तहत, स्थानीय स्तर पर रोजगार की गारंटी दी गई थी, जिससे ग्रामीण संपत्ति निर्माण और ग्राम अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिलती थी और श्रमिकों को वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की मांग करने का कानूनी अधिकार था, लेकिन अब इन गारंटियों को हटा दिया गया है।

‘केंद्र सरकार की एकमात्र उपलब्धि योजनाओं के नाम बदलना’

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार की एकमात्र उपलब्धि योजनाओं के नाम बदलना रही है। उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार द्वारा लगभग 30 जनहितैषी योजनाओं का या तो नाम बदल दिया गया है या उन्हें वापस ले लिया गया है। (Karnataka)

मुख्यमंत्री ने बताया कि नए कानून की धारा 5 (1) के तहत रोजगार केवल सरकार द्वारा अधिसूचित क्षेत्रों में ही दिया जाएगा, ग्राम पंचायतों के माध्यम से काम मिलने की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि कृषि के चरम मौसमों के दौरान कम से कम 60 दिनों तक मजदूरी पर रोजगार उपलब्ध नहीं होगा और मुद्रास्फीति से जुड़े वेतन संशोधन को हटा दिया गया है।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने पूर्ण केंद्रीय सहायता से वित्तपोषण का तरीका बदलकर 60:40 के केंद्र-राज्य अनुपात में कर दिया है, जिससे राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 258 और 280 का उल्लंघन करता है और भारत की संघीय संरचना को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की शक्तियां छीन ली गई हैं, जो संविधान और संघीय व्यवस्था के खिलाफ है। (Karnataka)

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नए कानून को निरस्त करने, एमजीएनआरईजीए अधिनियम को बहाल करने, महिलाओं और दलितों के रोजगार अधिकारों की रक्षा करने और पंचायत स्वशासन को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया था।

सीएम ने चेतावनी दी कि नया कानून बेरोजगारी बढ़ाएगा, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी कम करेगा, दलित और आदिवासी परिवारों पर दबाव बढ़ाएगा और ग्रामीण आजीविका के पतन का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि पंचायतें केवल कार्यान्वयन एजेंसियों तक सीमित रह जाएंगी और इस प्रकार एक ठेकेदार-चालित प्रणाली का निर्माण होगा। (Karnataka)


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