Kejriwal Petrol Price: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को ईंधन की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं घटाए जा रहे हैं। केजरीवाल का दावा है कि केंद्र सरकार जानबूझकर तेल कंपनियों को आम जनता की जेब काटकर ‘अवैध मुनाफा’ कमाने की खुली छूट दे रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि देश के नागरिकों को राहत देने के लिए पेट्रोल की कीमत को तुरंत 102 रुपये से घटाकर 82 रुपये प्रति लीटर किया जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरे दाम, तो भारत में क्यों नहीं मिल रही राहत?
Kejriwal Petrol Price: अरविंद केजरीवाल ने वैश्विक बाजार के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- मई से स्थिर हैं कीमतें: उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की प्रति बैरल कीमत में काफी कमी आई है। इसके बावजूद भारत में इस साल मई महीने से पेट्रोल की कीमत 102 रुपये प्रति लीटर पर ही टिकी हुई है।
- डीजल में भी कटौती की मांग: आप संयोजक ने मांग की है कि पेट्रोल के दाम घटाकर 82 रुपये प्रति लीटर किए जाएं और इसी अनुपात में डीजल की कीमतों में भी बड़ी कटौती की जाए।
ईंधन सस्ता होने से देश में कम होगी महंगाई: केजरीवाल का तर्क
Kejriwal Petrol Price: अरविंद केजरीवाल ने तर्क दिया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल वाहन मालिकों को प्रभावित नहीं करती हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध देश की पूरी अर्थव्यवस्था से है।
महंगाई पर लगेगा ब्रेक: केजरीवाल के मुताबिक, अगर देश में पेट्रोल और डीजल के दाम कम किए जाते हैं, तो माल ढुलाई (Transportation Cost) का खर्च काफी घट जाएगा। इसके चलते रोजमर्रा की जरूरी चीजों और अन्य सेवाओं की कीमतें भी नीचे आएंगी, जिससे देश में बढ़ती महंगाई से जूझ रही आम जनता को एक बहुत बड़ी राहत मिल सकती है।
2014 से अब तक 6 बार घटे वैश्विक दाम, सरकार ने कमाया ‘बंपर मुनाफा’
Kejriwal Petrol Price: केंद्र सरकार की तेल नीति को कटघरे में खड़ा करते हुए केजरीवाल ने पिछले कुछ वर्षों का एक पूरा ब्योरा जनता के सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2014 से लेकर अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में कम से कम छह बार बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
लेकिन इसके विपरीत, सरकार ने देश में पेट्रोल-डीजल के दाम उस अनुपात में कभी नहीं घटाए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार उन वर्षों के दौरान तेल कंपनियों द्वारा कमाए गए इस ‘बंपर मुनाफे’ का आखिर क्या कर रही है? कंपनियों को जनता की गाढ़ी कमाई लूटकर इस तरह अवैध मुनाफा कमाने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए, जो कि मौजूदा समय में ऊंचे दामों के जरिए खुलेआम हो रहा है।
ई-20 (E20) पेट्रोल विवाद पर भी ऑटो कंपनियों और पीएम को घेरने की तैयारी
Kejriwal Petrol Price: यह पहला मौका नहीं है जब अरविंद केजरीवाल ने देश के ईंधन सिस्टम को लेकर सरकार पर हमला बोला है। इससे पहले भी वे ई-20 (E-20) ईंधन को लेकर केंद्र सरकार और देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनियों पर निशाना साध चुके हैं।
केजरीवाल ने मारुति, टोयोटा और हीरो जैसी करीब 29 बड़ी ऑटो कंपनियों को पत्र लिखकर ई-20 फ्यूल की कार्यप्रणाली पर कई कड़े सवाल पूछे थे। उनका सीधा आरोप था कि सरकार ने ई-20 पेट्रोल को बढ़ावा देने के लिए ऑटो कंपनियों से झूठ बुलवाया है। इस तकनीकी और नीतिगत गड़बड़ी को लेकर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एक विस्तृत पत्र लिखने की बात कह चुके हैं। उनका मानना है कि ई-20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन को होने वाले नुकसान और इसकी वास्तविक उपयोगिता को लेकर देश के सामने पूरी पारदर्शिता रखी जानी चाहिए।
मानसून सत्र से पहले तेज होगी ईंधन के दामों पर राजनीतिक जंग
Kejriwal Petrol Price: अरविंद केजरीवाल का यह ताजा बयान ऐसे समय पर आया है जब देश में महंगाई और आम जनता की जेब पर बढ़ता बोझ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों और देश के घरेलू दामों में दिख रहा यह अंतर आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर एक बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आगामी संसद सत्र में सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बना रहा है। अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी के इस सीधे हमले और ₹82 प्रति लीटर पेट्रोल करने की मांग पर केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।









