Mahakaleshwar Mandir Ujjain: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में ‘वीआईपी दर्शन’ और गर्भगृह में चयनात्मक प्रवेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि धार्मिक अनुष्ठानों और मंदिर में प्रवेश के नियम तय करना अदालतों का काम नहीं है और यह न्यायसंगत (justiciable) मामला नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय (Mahakaleshwar Mandir Ujjain)
कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें कहा गया था कि गर्भगृह में प्रवेश का निर्णय मंदिर प्रबंधन समिति और उज्जैन कलेक्टर के विवेक पर निर्भर करता है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर गर्भगृह में अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) सख्ती से लागू किया गया, तो लोग वहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अन्य अधिकारों का भी दावा करने लगेंगे।
यह याचिका अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दर्पण अवस्थी और चर्चित शास्त्री द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि विशेष प्रवेश की अनुमति देना सामान्य भक्तों के साथ भेदभाव है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अनुमति दी कि वे इस संबंध में अपनी शिकायतें या सुझाव सीधे संबंधित मंदिर अधिकारियों के समक्ष रख सकते हैं। (Mahakaleshwar Mandir Ujjain)
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि इस तरह की याचिकाएं दायर करने वाले लोग सच्चे भक्त नहीं हैं और न्यायालयों को ऐसे विषयों के संबंध में दिशानिर्देश या नीतियां तय करने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील की संक्षिप्त दलील सुनने के बाद, न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ता को सरकारी अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दे दी।

महाकालेश्वर मंदिर का महत्व
भारत के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का हिंदू आध्यात्मिकता में अपार महत्व है। देशभर से लोग साल भर मंदिर में भस्म आरती देखने आते हैं, उनका मानना है कि इस पवित्र अनुष्ठान में शामिल होने से दिव्य आशीर्वाद, सुरक्षा और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। (Mahakaleshwar Mandir Ujjain)
पवित्र राख से अर्पित की जाने वाली भस्म आरती, महाकाल मंदिर के सबसे पूजनीय अनुष्ठानों में से एक है। यह ब्रह्म मुहूर्त में, सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच की जाती है, जिसे हिंदू परंपरा में अत्यंत शुभसमय माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म आरती में भाग लेने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें भगवान महाकाल का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंदिर की परंपराओं के अनुसार, यह अनुष्ठान सुबह तड़के मंदिर के द्वार खोलने के साथ शुरू होता है, जिसके बाद देवता को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। पंचामृत दूध, दही, घी, चीनी और शहद का एक पवित्र मिश्रण है। स्नान के बाद, शिवलिंग को भांग और चंदन के लेप से सजाया जाता है, जो पवित्रता और पावनता का प्रतीक है। (Mahakaleshwar Mandir Ujjain)









