Parliament Crisis: भारतीय संसदीय इतिहास में आज एक ऐसा अध्याय जुड़ गया है, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों से लेकर आम जनता तक की धड़कनें बढ़ा दी हैं। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन के भीतर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने न केवल संसद की मर्यादा पर सवाल उठाए हैं, बल्कि देश के सबसे सुरक्षित व्यक्ति यानी प्रधानमंत्री की सुरक्षा में एक ‘अदृश्य चूक’ की ओर इशारा कर दिया है।
Parliament Crisis: भरे सदन में क्या बोले स्पीकर ओम बिरला?
स्पीकर ओम बिरला ने भरे सदन में बेहद गंभीर स्वर में कहा, “कल सदन में जो हुआ, वह लोकतंत्र पर एक काले धब्बे की तरह है। हालात इतने बेकाबू थे कि मैंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया था कि वे सदन में न आएं, क्योंकि उनके साथ कुछ भी अप्रत्याशित हो सकता था।” स्पीकर का यह कहना कि देश के प्रधानमंत्री अपने ही सदन में सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे थे, सत्ता के गलियारों में सन्नाटा खींच देने वाला है।
अब स्पीकर के इस तरह के बयान ने कानूनविदों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। और लोगों को सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया हैं कि, क्या सदन के भीतर का शोर-शराबा शारीरिक हमले की सीमा तक पहुँच गया था?
और क्या अब यह ‘ब्रीच ऑफ प्रिविलेज’ (विशेषाधिकार हनन) का मामला है या फिर सीधे तौर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल की विफलता? तो वहीं कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि स्पीकर को प्रधानमंत्री की सुरक्षा का खतरा महसूस हुआ, तो यह संसदीय कार्यवाही के नियमों के उल्लंघन से कहीं बड़ा मामला है। (Parliament Crisis)
सोशल मीडिया पर #ParliamentCrisis कर रहा ट्रेंड
इस बयान के आते ही विपक्षी खेमा आगबबूला हो गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे ‘विक्टिम कार्ड’ करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार जनता के सवालों और सदन की चर्चा से भागने के लिए सुरक्षा का बहाना बना रही है। सोशल मीडिया पर #ParliamentCrisis ट्रेंड कर रहा है, जहाँ देश दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। (Parliament Crisis)
फिलहाल, आम जनता इस बात से परेशान है कि अगर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर स्पीकर इतने चिंतित हैं, तो फिर देश की कानून-व्यवस्था की स्थिति क्या है? क्या वाकई कल सदन में कुछ ऐसा हुआ था जिसे कैमरे की नजरों से छिपा लिया गया?
आपको बता दें कि, यह बयान अब केवल एक आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं रह गया है, बल्कि एक राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन चुका है। क्या स्पीकर के पास ऐसी कोई खुफिया जानकारी थी? क्या विपक्ष का विरोध अब हिंसक मोड़ ले चुका है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में देश की राजनीति की दिशा तय करेंगे। (Parliament Crisis)









