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सिस्टम की बेरुखी या शहादत का अपमान? स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी समेत 36 के नाम ‘SIR’ से कटे; क्या इन्हीं दिनों के लिए वीरों ने दी थी कुर्बानी?

SIR Controversy

SIR Controversy: आज जब पूरा देश अपनी आजादी का जश्न मनाता है और वीरों की गाथाएं सुनाता है, तब उसी देश के भीतर से एक ऐसी खबर आई है जो किसी भी संवेदनशील नागरिक की आंखों में आंसू ला दे। एक तरफ हम डिजिटल इंडिया और पारदर्शी सिस्टम का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम (SIR) ने एक झटके में एक स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी समेत 36 नागरिकों का अस्तित्व अपनी सूचियों से मिटा दिया।

आंखों में धुंधलापन और हाथों में वो फॉर्म लिए, जो उन्होंने बीएलओ (BLO) को सौंपे थे, स्वतंत्रता सेनानी की वयोवृद्ध पत्नी की बेबसी आज पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर रही है। उनका नाम मतदाता सूची (SIR) से काट दिया गया है। यह सिर्फ एक ‘नाम’ का कटना नहीं है, बल्कि उस लोकतांत्रिक पहचान को छीनना है जिसके लिए उनके पति ने अपनी जवानी जेलों में काटी और लाठियां खाई थीं। (SIR Controversy)

SIR Controversy: आजादी का जश्न या बेबसी का मंजर

पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने नियम के मुताबिक बीएलओ को फॉर्म भरकर दिए थे। लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ ‘आपत्तियां’ दर्ज की गईं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किन लोगों ने उन शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कीं, जिन्होंने इस देश की नींव रखी? और सिस्टम ने बिना किसी गहन जांच के उनके नाम काटने का दुस्साहस कैसे किया? (SIR Controversy)

36 परिवारों का नाम कटना इस बात का प्रमाण है कि नौकरशाही की फाइलें अब इतनी भारी हो चुकी हैं कि उनके नीचे आम आदमी का सम्मान और देश का गौरव दबकर दम तोड़ रहा है। इस घटना के बाद इलाके में भारी रोष है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब वीरों के परिवारों को अपनी नागरिकता और अपने हक के लिए एक बार फिर से लड़ना होगा? यदि एक स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की क्या बिसात?
​सिस्टम की इस ‘आपत्तिजनक’ कार्रवाई ने आज हर उस व्यक्ति को झकझोर दिया है जो तिरंगे और उसके पीछे के बलिदानों का सम्मान करता है।

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