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POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ीं मुश्किलें, अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे शिकायतकर्ता

Swami Avimukteshwaranand Saraswati

Swami Avimukteshwaranand Saraswati: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 25 मार्च को POCSO मामले में सरस्वती को अग्रिम जमानत दे दी। उच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत दर्ज कराने में देरी और कथित पीड़ितों के बयानों में विसंगतियों का हवाला दिया।

Swami Avimukteshwaranand Saraswati: POCSO केस में हाईकोर्ट के फैसले पर उठते कानूनी सवाल

उच्च न्यायालय ने पाया कि शिकायतकर्ता, जिसने खुद को पीड़ितों का अभिभावक बताया था, उनको घटना की जानकारी 18 जनवरी, 2026 को मिली, लेकिन उसने छह दिन बाद पुलिस को इसकी सूचना दी और कहा कि वह पूजा/यज्ञ में व्यस्त थी।

सरस्वती को दी गई अग्रिम जमानत के खिलाफ अपनी याचिका में, मुखबिर ने तर्क दिया है कि उच्च न्यायालय का निर्णय त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि अपने आदेश में न्यायालय ने आरोपी को अग्रिम जमानत देते समय मामले के तथ्यों पर विचार किया है। (Swami Avimukteshwaranand Saraswati)

मुखबिरों के वकील के अनुसार, सरस्वती को राहत देने का फैसला करते समय उच्च न्यायालय ने एक लघु सुनवाई की है। याचिका में आगे कहा गया है कि ऐसे जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों में, आमतौर पर यह सिद्धांत अपनाया जाता है कि प्रारंभिक चरण में राहत प्रदान नहीं की जाती है।

शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया कि उसे उच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। इसके अलावा, याचिका में सरस्वती की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है, इस आधार पर कि उच्च न्यायालय के उस निर्देश के बावजूद जिसमें मामले के पक्षों को मीडिया से साक्षात्कार देने से प्रतिबंधित किया गया था। (Swami Avimukteshwaranand Saraswati)

आरोपी सरस्वती ने जमानत मिलने के तुरंत बाद मीडिया से बात की और कहा कि उनके खिलाफ मामला झूठा और राजनीतिक रूप से प्रेरित है। याचिका में आरोपी द्वारा उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के तुरंत बाद सार्वजनिक भाषण देने, रैलियों में भाग लेने और धार्मिक यात्राओं पर जाने के आचरण पर भी सवाल उठाए गए हैं।

याचिका में तर्क दिया गया है कि आरोपियों के ऐसे आचरण से मामले के कथित पीड़ितों के मन में खतरे और भय की भावना पैदा होती है। यह याचिका अधिवक्ता सौरभ ए गुप्ता के माध्यम से दायर की गई है। (Swami Avimukteshwaranand Saraswati)

प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत के आदेश पर फरवरी 2026 में झूंसी थाने में यह एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें माघ मेले के दौरान दो नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 25 मार्च, 2026 को अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत दी थी। अदालत ने पीड़ितों के आचरण को ‘असामान्य’ बताया था क्योंकि उन्होंने अपने प्राकृतिक अभिभावकों के बजाय एक अजनबी (शिकायतकर्ता) को जानकारी दी थी।


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