पटना आयोजित ‘दही-चूड़ा’ भोज में जहाँ एकता के दावे किए जा रहे थे, वहीं छोटे भाई तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने जिस मजाकिया अंदाज में इसकी वजह बताई, उसने इस विवाद को और हवा दे दी है।
“मकर संक्रांति के मौके पर जब पूरा लालू परिवार और महागठबंधन के दिग्गज एक साथ दही-चूड़ा का आनंद ले रहे थे, तब एक खाली कुर्सी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया—वह कुर्सी थी बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की। बड़े भाई तेज प्रताप यादव द्वारा आयोजित इस भव्य भोज में तेजस्वी की अनुपस्थिति ने एक बार फिर ‘ऑल इज नॉट वेल’ (सब कुछ ठीक नहीं है) के संकेतों को जन्म दे दिया है।

तेज प्रताप नें छोटे भाई तेजस्वी के ना आने पर ली चुटकी
जब मीडिया ने तेज प्रताप से इस दूरी का कारण पूछा, तो उन्होंने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में कह दिया—’तेजस्वी जी थोड़ा लेट से सोकर उठते हैं।’ क्या यह बयान महज एक चुटकी थी या इसके पीछे भाइयों के बीच शक्ति प्रदर्शन (Power Struggle) की कोई गहरी कहानी छिपी है? कड़ाके की ठंड में परोसे गए इस दही-चूड़ा ने बिहार की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।”
तेजस्वी की गैरहाजिरी: भोज की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई, जिसमें लालू यादव और राबड़ी देवी मौजूद थे। दोपहर 2 बजे तक भी तेजस्वी यादव पंडाल में नजर नहीं आए, जबकि वे शहर में ही मौजूद थे।
तेज प्रताप का ‘विवादित’ बयान: मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए तेज प्रताप ने हंसते हुए कहा, “वो (तेजस्वी) थोड़ा लेट से सोकर उठते हैं, आएंगे तो खाएंगे। हम तो सुबह ही नहा-धोकर पूजा करके तैयार हो गए थे।”
लालू यादव का बचाव: जब लालू यादव से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मामले को संभालते हुए कहा कि तेजस्वी किसी जरूरी काम में व्यस्त हैं और बाद में शामिल होंगे।
विपक्ष का हमला: बीजेपी ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो नेता दोपहर तक सोकर उठता है, वह बिहार की जनता की समस्याओं को कब देखेगा? यह परिवार की आंतरिक कलह का सार्वजनिक प्रदर्शन है।
“भले ही तेज प्रताप ने इस गैरमौजूदगी को हंसी में उड़ा दिया हो, लेकिन राजनीति में ‘टाइमिंग’ ही सब कुछ होती है। ऐसे समय में जब लालू यादव परिवार को एकजुट दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, तेजस्वी का न पहुंचना और तेज प्रताप का उन पर ‘देर से उठने’ का तंज कसना, विरोधियों को बैठे-बिठाए मुद्दा दे गया है। अब देखना यह होगा कि शाम तक तेजस्वी की एंट्री इस विवाद को ठंडा करती है या यह ‘दही-चूड़ा’ भोज राजद के लिए एक नई सिरदर्दी साबित होगा।”









