सफेदपोश नकल माफियाओं और सेटिंग करने वालों की अब खैर नहीं! मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में ‘मेरिट’ ही चयन का एकमात्र आधार होगी। अप्रैल 2025 में आयोजित हुई असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को धांधली की पुष्टि होने के बाद रद्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा है “अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले जेल की सलाखों के पीछे होंगे।”
उत्तर प्रदेश के प्रतियोगी छात्रों के लिए एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा (विज्ञापन संख्या-51) को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का कड़ा फैसला लिया है।

सीएम योगी ने दिए थे जांच के आदेश
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एसटीएफ को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या 51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद हेतु अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा के संबंध में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली से जुड़ी सूचनाएं प्राप्त हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गोपनीय जांच के आदेश दिए गए।
प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए दिनांक 20-04-2025 को एसटीएफ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गैंग के तीन अभियुक्तों महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों पर परीक्षा में धांधली एवं अवैध धन वसूली के आरोप लगे हैं। ये परीक्षा 16-04-2025 व 17-04-2025 को हुई थी।

उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग का कर्मचारी हुआ था गिरफ्तार
यूपी एसटीएफ ने इस मामले में लखनऊ के विभूति खंड थाने में FIR दर्ज कराई थी। जांच की निष्पक्षता एवं गोपनीयता सुनिश्चित रखने के उद्देश्य से तत्कालीन आयोग की अध्यक्ष से त्यागपत्र लिया गया। चूंकि अभियुक्त महबूब अली निवर्तमान आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। पूछताछ के दौरान अभियुक्त महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसके द्वारा मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र निकाल लिए गए थे, जिन्हें उसने कई अभ्यर्थियों को विभिन्न माध्यमों से धन लेकर उपलब्ध कराया। अभियुक्त महबूब अली की स्वीकारोक्ति की एसटीएफ द्वारा गहन विवेचना एवं डेटा एनालिसिस से पुष्टि हुई है।
जांच के बाद आरोपियों के पास से मिले कुछ अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों के आधार पर कई अन्य आरोपियों के भी नाम सामने आए। इसके बाद आयोग को पत्र लिखकर संदिग्ध अभ्यर्थियों का डेटा मांगा गया। एसटीएफ की जांच में पता चला कि इम्तिहान में गड़बड़ी हुई। इसके बाद आज सीएम योगी ने परीक्षा रद्द करने के आदेश दिए।









