पहलगाम आतंकी (Pahalgam Terror)हमले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपनी टिप्पणियों को लेकर कानूनी चक्रव्यूह में फंसी नेहा सिंह राठौर ने देश की सबसे बड़ी अदालत में बड़ी जीत हासिल की है। जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका ठुकरा दी थी और गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी, तब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक आदेश ने यूपी पुलिस के कदमों को फिलहाल रोक दिया है। यह सिर्फ एक कानूनी राहत नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी की बहस में एक नया मोड़ है।

भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर (Neha Singh Rathore)के लिए आज का दिन कानूनी मोर्चे पर बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे पिछले कई महीनों से उन पर मंडरा रहा गिरफ्तारी का संकट फिलहाल टल गया है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं

1. गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक (Interim Stay): कोर्ट ने नेहा सिंह राठौर की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है और आदेश दिया है कि उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई (Coercive Steps) न की जाए।
2. यूपी सरकार को नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जमानत न देने के फैसले को चुनौती देने वाली नेहा की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता अभय प्रताप सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
3. जांच में सहयोग की शर्त (19 जनवरी की डेडलाइन): कोर्ट ने राहत देने के साथ ही एक सख्त शर्त भी रखी है। नेहा सिंह राठौर को 19 जनवरी 2026 को पुलिस की पूछताछ में शामिल होना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया, तो इस अंतरिम राहत को वापस भी लिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद नेहा की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बाद नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर एक संक्षिप्त प्रतिक्रिया में लिखा-‘माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मेरी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इस बड़ी राहत के लिए आपका धन्यवाद।’
क्या है पूरा विवाद?
- पहलगाम में हमले को लेकर टिप्पणी: अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के बाद नेहा ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किए थे।
- आरोप: लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज FIR के अनुसार, उन पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और देश की अखंडता को चुनौती देने (राजद्रोह जैसी धाराओं के तहत) के आरोप हैं।
- हाईकोर्ट का रुख: इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि बोलने की आजादी असीमित नहीं है और संवेदनशील समय पर किए गए पोस्ट शांति भंग कर सकते हैं।









