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UP TB Campaign: यूपी सरकार का टीबी रोगी खोज अभियान, सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य को तपेदिक (TB) मुक्त बनाने के लिए एक और निर्णायक कदम उठाया है। पूरे प्रदेश में फरवरी माह से ‘100 दिवसीय विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान’ का आगाज होने जा रहा है। “उत्तर प्रदेश को ‘लाल थूक’ और फेफड़ों की बीमारी से पूरी तरह निजात दिलाने के लिए योगी सरकार (Yogi Government) ने अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन तैयार किया है। फरवरी 2026 से शुरू होने वाले इस 100 दिवसीय सघन अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें न केवल शहरी मलिन बस्तियों और जेलों तक पहुंचेंगी, बल्कि प्राइमरी स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक जागरूकता की मशाल जलाएंगी। 2015 के मुकाबले टीबी मृत्यु दर में पहले ही 17% की कमी ला चुकी यूपी सरकार का लक्ष्य अब उन ‘छिपे हुए मरीजों’ को ढूंढना है जो जाने-अनजाने इस बीमारी को फैला रहे हैं। क्या जनभागीदारी और आधुनिक तकनीक का यह संगम 2025-26 तक यूपी को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल कर पाएगा?”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विभाग ने एक बार फिर से फरवरी में सघन टीबी रोगी खोज अभियान चलाने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी) डॉ. आरपी सिंह सुमन ने जनभागीदारी के महत्व को ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।

सभी सीएमओ को निर्देश दिया गया है कि दो माह में सांसदों के साथ जनपद स्तरीय समीक्षा करवाएं और उन्हें निःक्षय शिविर व अन्य जनभागीदारी गतिविधियों में शामिल करें। ये समीक्षा बैठकें आगे भी जारी रहेंगी। इसके अलावा विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, प्रधानों व पार्षदों को भी अभियान से जोड़ें। अभियान में सामाजिक जन जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘माई भारत’ वालंटियर्स व अन्य पंजीकृत निःक्षय मित्रों का भी उपयोग करें।

शैक्षिक संस्थानों में जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं को टीबी के लक्षणों (जैसे 2 हफ्ते से अधिक खांसी, रात में पसीना, वजन कम होना) के प्रति जागरूक किया जाएगा।

CM Yogi Hails PRAGATI Portal

 तकनीकी सहायता: ‘माई भारत’ (MY Bharat) वालंटियर्स और निक्षय मित्रों की मदद से मरीजों की पहचान और उनके पोषण की निगरानी की जाएगी। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए सैम्पल कलेक्शन को और तेज किया जाएगा।

रोजगार से जुड़ाव: सरकार ने कौशल विकास विभाग को पत्र लिखकर टीबी से ठीक हो चुके मरीजों को रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग में प्राथमिकता देने को कहा है, ताकि वे मुख्यधारा में लौट सकें।

डीजी ने सभी कारागारों व मलिन बस्तियों में टीबी स्क्रीनिंग कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक में निबंध, पोस्टर प्रतियोगिता समेत विभिन्न माध्यमों से छात्र-छात्राओं में जागरूकता फैलाने के लिए कहा है। इसके अलावा समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जागरूक करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि वे टीबी के लक्षण वाले लोगों को स्क्रीनिंग के लिए भेज सकें। परिवहन विभाग से जुड़े समस्त चालकों व कंडक्टरों की स्क्रीनिंग कराने व कारखानों में काम करने वालों की भी शिविर लगाकर जांच करने को कहा गया है।

“100 दिनों का यह सघन अभियान केवल मरीजों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टीबी के मरीजों के प्रति सामाजिक भेदभाव (Stigma) को खत्म करने की भी एक कोशिश है। निक्षय पोषण योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक मदद और घर-द्वार पर मिल रही जांच की सुविधा ने मरीजों का भरोसा बढ़ाया है। यदि यह अभियान अपनी पूरी क्षमता से सफल रहता है, तो उत्तर प्रदेश देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जो वैश्विक समय सीमा से पहले ही टीबी को जड़ से खत्म करने की दहलीज पर होंगे।”

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