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‘जहाज पर बीते खौफनाक दिन…’, संघर्ष के बीच सुरक्षित घर लौटे UP के मर्चेंट नेवी नाविक की दास्तान; सुनकर दहल जाएगा दिल

West Asia Conflict

West Asia Conflict: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के निवासी और मर्चेंट नेवी नाविक शिवेंद्र कुमार चौरसिया, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच से सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे समुद्र में धमाकों के बीच उनकी जान खतरे में थी। यह खबर उन हजारों भारतीय नाविकों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जो विदेशी समुद्रों में काम करते हैं।

मीडिया से बात करते हुए चौरसिया ने कहा कि वह 2014 से जहाजों पर काम कर रहे हैं और हाल ही में दिसंबर में एक जहाज में शामिल हुए थे जब क्षेत्र में स्थिति बिगड़ गई थी। उन्होंने बताया कि उनके जीवन में ऐसी समस्या कभी नहीं आई। उन्होंने याद किया कि 28 फरवरी को उनके जहाज के पास विस्फोट शुरू हुए, जिसमें पहला बड़ा विस्फोट 3 मार्च को हुआ, जिससे चालक दल में दहशत फैल गई और उन्होंने तुरंत शिपिंग कंपनी से संपर्क किया। (West Asia Conflict)

West Asia Conflict: कप्तान और कंपनी की त्वरित कार्रवाई

शिवेंद्र कुमार चौरसिया ने बताया, ‘कैप्टन ने कहा था कि अगर ऐसी कोई समस्या आती है, तो हम यहाँ से लंगर उठाकर अपने जहाज को सुरक्षित स्थान पर ले जाएँगे। 28 फरवरी को धमाके शुरू हुए। लेकिन पहला धमाका 3 मार्च को हमारे जहाज के पास हुआ। तभी हम डर गए। हमने कंपनी से बात की। कंपनी ने भी कहा कि हम आपको सुरक्षित स्थान पर ले जाएँगे।

अब, कैप्टन और कंपनी के बीच जो भी बात हुई, उसके बाद कैप्टन ने कहा, ठीक है, अब हम डीजी शिपिंग को मेल करेंगे और एक छोटा वीडियो भेजेंगे। तो हमने, कैप्टन ने खुद, वीडियो बनाया, खुद को रिकॉर्ड किया और सुरक्षा के लिए डीजी शिपिंग को दे दिया। हर कोई डरा हुआ था, बस उस स्थिति से निकलना चाहता था। उस समय, बस यही उम्मीद थी कि कोई हमारी मदद करे।’ (West Asia Conflict)

युद्धविराम की उम्मीद में हर दिन खबरों पर नजर

चौरासिया ने कहा कि लगातार हो रहे विस्फोटों से जहाज पर सवार लोगों में अत्यधिक चिंता का माहौल बन गया, जिसकी वजह से वह और उनके साथी कई रातों तक सो नहीं पाए। वे युद्धविराम (ceasefire) की खबरों के लिए लगातार इंटरनेट पर नजर रखते थे।

उन्होंने बताया, ‘विस्फोट इतने ज़ोर-शोर से हो रहे थे कि शुरू में सोना भी मुश्किल हो गया था। मतलब, हर पल यही डर बना रहता था कि हम यहाँ से कब निकल पाएँगे। हम रोज़ाना खबरें देखते रहते थे। हमारी कंपनी ने बहुत अच्छा काम किया। उन्होंने हमें इंटरनेट मुहैया कराया था। हम रोज़ गूगल पर खबरें देखते थे, उम्मीद करते थे कि युद्ध खत्म हो जाए या युद्धविराम हो जाए। अगर ऐसा होता तो अच्छा होता।’ (West Asia Conflict)

सुरक्षित वापसी पर राहत, लेकिन बाकी साथियों की चिंता

यह पूछने पर कि आपको वहां क्यों जाना पड़ता है, उन्होंने जवाब दिया, ‘यह देश पर निर्भर करता है, क्योंकि हमें एक देश से दूसरे देश में माल ले जाना होता है। हमारा जहाज एक बल्क कैरियर था, इसलिए जाहिर है, हम चूना पत्थर, जस्ता या लौह अयस्क, जो भी थोक में उपलब्ध होता है, उसे लोड करते थे और एक देश से दूसरे देश में ले जाते थे।’

चौरासिया ने कहा, ‘जिस स्थिति में हम थे, मुझे लगता है कि वह बहुत खराब थी। हमारे कुछ और साथी भी वहाँ जहाजों पर फंसे हुए हैं, जहाँ न इंटरनेट है और न ही खाना। मैं इस युद्ध के बारे में कुछ नहीं कह सकता क्योंकि कभी-कभी युद्धविराम होता है, और फिर यह दोबारा शुरू हो जाता है। अगर दोपहर में युद्धविराम होता था, तो शाम को धमाका हो जाता था। (West Asia Conflict)

आंखों के सामने डूबते जहाजों का भयावह मंजर

मैंने कम से कम चार जहाजों को डूबते देखा। एक जहाज मेरी आंखों के सामने डूब गया। ईरानी नौसेना ने एक युद्धपोत पर हमला किया और उसे ले जा रहे थे। एक टगबोट उसे लेने आई, और उन्होंने उस पर भी हमला कर दिया। इस तरह, दो जहाज मेरी आंखों के सामने डूब गए। कितने धमाके हुए, इसकी गिनती नहीं है। आज भी धमाकों की आवाज सुनकर मेरा सिर भारी हो जाता है।’

सुरक्षित लौटने पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार को उनकी सुरक्षित वापसी के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने अन्य भारतीय नाविकों के लिए भी चिंता जताई जो अभी भी वहां बिना पर्याप्त भोजन और इंटरनेट के फंसे हुए हैं। (West Asia Conflict)


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