West Bengal Ration Scam: कोलकाता से एक बार फिर वही तस्वीर सामने आई है, जो हर चुनाव से ठीक पहले देश के राजनीतिक सिस्टम पर सवाल छोड़ जाती है। दरअसल, 25 अप्रैल 2026 की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में राशन वितरण (PDS) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में एक साथ 9 ठिकानों पर धावा बोला। कोलकाता, बर्धमान और हाबरा में फैली इस कार्रवाई ने सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है।
West Bengal Ration Scam: 762 किलो आटे से शुरू हुआ 1000 करोड़ का खेल
इस पूरे केस की जड़ें 2020 में बशीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामूली FIR में मिलती हैं। शुरुआत में, यह केवल 762 किलो राशन आटे की अवैध बिक्री का मामला था।
- बदली गई पहचान: गरीबों के लिए आने वाले गेहूं और चावल को खुले बाजार में बेचने के लिए FCI के बोरों को बदल दिया जाता था।
- सिस्टम में सेंध: सप्लायर्स और बिचौलियों ने मिलकर पूरी सप्लाई चेन को ही मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क में बदल दिया।
- सीमा पार तस्करी: आरोप है कि करीब 5000 टन गेहूं फर्जी दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेश तस्करी किया गया।
यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब इस घोटाले की गहराई तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं। दरअसल, यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि गरीबों के हक पर डाका है।
गिरफ्तारी और ‘मैरून डायरी’ का सस्पेंस
ED की कार्रवाई अब केवल छापों तक सीमित नहीं रही। परिणामस्वरूप, इस मामले में कई बड़े नाम पहले ही सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं।
- ज्योति प्रिय मल्लिक: पूर्व खाद्य मंत्री की गिरफ्तारी अक्टूबर 2023 में हुई थी।
- डायरी का राज: मंत्री के करीबी के घर से एक ‘मैरून डायरी’ मिली थी। कहा जा रहा है कि इसमें अवैध लेन-देन का पूरा कच्चा चिट्ठा दर्ज है।
- करोड़ों की कुर्की: ED अब तक इस मामले में करीब 50.47 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है।
चुनाव, जांच और सियासत: टाइमिंग पर सवाल
बंगाल में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान हो चुका है और 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग है। यही वजह है कि इस छापेमारी के टाइमिंग को लेकर घमासान मचा है।
- TMC का आरोप: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है। उनका कहना है कि चुनाव के समय विपक्ष को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल हो रहा है।
- विपक्ष का प्रहार: बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह भ्रष्टाचार की पुरानी जड़ें हैं, जिन्हें अब उखाड़ा जा रहा है।
- नुसरत जहाँ पर शिकंजा: इस घोटाले की आंच अभिनेत्री और पूर्व सांसद नुसरत जहाँ तक भी पहुँची है, जिनसे पहले भी पूछताछ हो चुकी है।
गरीबों की थाली से मनी लॉन्ड्रिंग तक
सबसे बड़ा सवाल यही है कि गरीबों के लिए बनी योजना एक मल्टी-लेयर मनी नेटवर्क में कैसे बदल गई। दरअसल, सरकारी अनाज की पहचान मिटाकर उसे बाजार में बेचना एक संगठित अपराध बन चुका था। अंततः, ED की कार्रवाई अभी जारी है और हर नए दस्तावेज के साथ जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। यही नहीं, इस कार्रवाई का असर 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान पर भी पड़ सकता है।









