“क्या भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर (INDORE) में लोग पानी पीकर मर रहे हैं? जहाँ रिकॉर्ड्स में इंदौर नंबर-1 है, वहीं जमीन पर पाइपलाइनों में सीवर का जहर घुल चुका है। 15 लोगों की चिताएं जलने के बाद जब राहुल गांधी ने सवाल पूछा— ‘प्रशासन कुंभकर्णी नींद में क्यों है?’, तो सत्ता के गलियारों में सन्नाटा पसर गया। आखिर इस ‘नरसंहार’ का जिम्मेदार कौन है?” आपको बताते चलें कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले 10 दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति के कारण एक भयानक त्रासदी सामने आई है। हालांकि मरने वालों की संख्या का आंकड़ा अभी पूरी तरह से क्लीयर नहीं है। जबकि प्रशासन अभी भी आंकड़े कम बता रहा है।
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी (Contaminated Water) के कारण मचे हाहाकार ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।

राहुल गांधी का सरकार पर सीधा हमला:
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सरकार को घेरते हुए कहा:
- प्रशासन की लापरवाही: राहुल (RAHUL GANDHI) ने तंज कसा कि इंदौर (INDORE) का प्रशासन ‘कुंभकर्णी नींद’ में सो रहा था, जबकि लोग बार-बार गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे।
- अधिकारों की हत्या: उन्होंने कहा कि साफ पानी कोई ‘एहसान’ नहीं बल्कि जीवन का अधिकार है और बीजेपी सरकार ने इस अधिकार की हत्या की है।
- अहंकारी रवैया: राहुल ने बीजेपी नेताओं के बयानों को अहंकारी बताया और कहा कि जिनके घरों के चिराग बुझ गए, उन्हें सांत्वना के बजाय सरकार घमंड परोस रही है।

त्रासदी के पीछे की सच्चाई
- सीवर और पेयजल का मिलन: जांच में पाया गया कि पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय (Public Toilet) के नीचे से गुजर रही थी। पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण सीवर का गंदा पानी सप्लाई में मिल गया।
- जानलेवा बैक्टीरिया: मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि पानी के नमूनों में मानव मल (Human Waste) में पाए जाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया (BACTERIA) मौजूद थे।
- बीमारी का दायरा: इस दूषित पानी से अब तक 2,800 से अधिक लोग बीमार हुए हैं और लगभग 162 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से कई ICU में हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (MP HIGH COURT)तक पहुँच गया है। कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अब तक दो अधिकारियों को निलंबित और एक सब-इंजीनियर को बर्खास्त किया गया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, लेकिन कई परिवारों ने ‘अपराधियों को सजा’ की मांग करते हुए चेक लेने से इनकार कर दिया है।









