ऑपरेशन ‘एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’
अमेरिका की खुलेआम “डकैती”
(असली खेल समझिए)
तारीख- 3 जनवरी 2026
समय- रात के करीब 2 बजे।
काराकास, वेनेजुएला की राजधानी के आसमान में सन्नाटा था, जो अचानक अमेरिकी लड़ाकू विमानों की गूंज से टूट गया। अमेरिका की ‘डेल्टा फोर्स’ ने एक बेहद सटीक सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया। यह कोई साधारण हमला नहीं था; यह एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ थी जिसका लक्ष्य था—निकोलस मादुरो।
मादुरो को उनके गढ़ ‘मिराफ्लोरेस पैलेस’ से गिरफ्तार किया गया और सीधे न्यूयॉर्क ले जाया गया। अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार था जब किसी देश के मौजूदा राष्ट्रपति को सेना के ज़रिए उनके घर से उठाकर अमेरिकी अदालत में पेश किया गया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिये किया गया क्योंकि मादुरै के शासनकाल में लगातार अमेरिकी धरती पर वेनेजुएला से ड्र्ग्स की भारी तस्करी हो रही थी। लेकिन असली कारण ये नहीं है। और अगर होता भी तो उसके लिये किसी देश के राष्ट्रपति को सरेआम उठा लेना तो किसी तरह से रास्ता नहीं था। पर ऑफ द रिकॉर्ड पीछे की कहानी कुछ और है। वो कहानी जो पर्दे के पीछे है।

अमेरिका की असली रणनीति- गिरफ्तारी के पीछे का ‘मास्टरप्लान‘
सोच के देखिए जिस ड्र्ग्स के तथाकथित नेटवर्क को ट्रम्प रोकना चाहते थे उसके बहुत रास्ते हो सकते थे पर सीधे राष्ट्रपति को उठा लेना बहुत बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। आपको याद होगा कि कैसे साल 2003 में इराक में सद्दाम हुसैन का अंत किया गया था? अमेरिका ने दावा किया कि सद्दाम हुसैन के पास विनाशकारी हथियार हैं। जबकि असली बात ये थी कि इराक के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल भंडार था। सद्दाम ने तेल का व्यापार डॉलर के बजाय ‘यूरो’ में करने की धमकी दी थी, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा था। अंजाम ये हुआ कि सद्दाम को पकड़ा गया, फांसी दी गई और इराक के तेल क्षेत्रों पर अमेरिकन कंपनियों का बोलबाला हो गया।
साल 2011 में मुअम्मर गद्दाफी का पतन और मौत याद है? लीबिया अफ्रीका का सबसे समृद्ध तेल वाला देश था। अमेरिका ने बहाना बनाया कि नागरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिये लीबिया में दख़ल ज़रूरी है। जबकि असली बात ये थी कि गद्दाफी ‘गोल्डन दीनार’ नाम की एक नई मुद्रा लाना चाहते थे ताकि पूरे अफ्रीका का तेल सोने के बदले बेचा जा सके। यह बाजार में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को खत्म कर देता। अंजाम ये हुआ कि नाटो के हमलों के बाद गद्दाफी की हत्या कर दी गई। आज लीबिया अराजकता में है, लेकिन उसका तेल बाज़ार फिर से अमेरिकी नियंत्रण में है।

तेल के लिए अमेरिका का दूसरे देशों पर हमले का इतिहास बहुत पुराना है। अमेरिका ने साल 1953 में ईराक़ में ऑपरेशन अजाक्स को अंजाम दिया था। जब ईरान के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेघ ने ईरान की तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था, जिससे ब्रिटिश और अमेरिकी कंपनियों का मुनाफा छिन गया। इसके जवाब में सीआईए (CIA) ने एक गुप्त ऑपरेशन चलाकर मोसादेघ की सरकार गिरा दी और अमेरिका समर्थक ‘शाह’ को सत्ता सौंप दी। और नतीजा ये हुआ कि अगले 25 सालों तक ईरान का तेल अमेरिका के इशारों पर बिकता रहा।
अब वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ़्तारी पनामा के मैनुअल नोरिएगा की गिरफ्तारी की भी याद दिलाती है। नोरिएगा पर ड्रग तस्करी का आरोप लगा। जबकि असली खेल ये था कि नोरिएगा ‘पनामा नहर’ (Panama Canal) पर अमेरिकी नियंत्रण को चुनौती दे रहे थे, जो तेल और व्यापारिक जहाजों के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। नतीजा ये हुआ कि अमेरिकी सेना ने पनामा पर हमला किया, राष्ट्रपति नोरिएगा को उनके महल से गिरफ्तार किया और उन्हें जेल में डाल दिया।
अब वेनेजुएला की बात भी समझिए। वेनेजुएला के पास इराक और सऊदी अरब से भी ज़्यादा तेल जो कि क़रीब 303 बिलियन बैरल है। अमेरिका के पास खुद तेल है, लेकिन वह नहीं चाहता कि उसके दुश्मन देश रूस और चीन इस खजाने पर कब्ज़ा जमाएं।

दरअसल अमेरिका दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि Western Hemisphere में उसका दबदबा निर्विवाद है। मादुरो को हटाकर अमेरिका ने रूस, चीन और ईरान को साफ कर दिया है कि उसके ‘आँगन’ में किसी और की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके पीछे ऊर्जा की बादशाहत बनाए रखने की बड़ी कोशिश असली वजह है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल (Crude Oil) का भंडार है। मादुरो के रहते यह तेल अमेरिका की पहुँच से बाहर था। अब ‘सत्ता परिवर्तन’ के बहाने अमेरिका वहां की तेल इंडस्ट्री पर अपना नियंत्रण चाहता है, ताकि दुनिया भर के तेल बाज़ारों (Global Oil Markets) पर उसकी पकड़ और मजबूत हो सके।
कानूनी तौर पर, अमेरिका ने इसे ‘ड्रग तस्करी’ के खिलाफ कार्रवाई बताया है। मादुरो पर अमेरिकी धरती पर कोकीन भेजने का आरोप है। इस कानूनी ढाल का इस्तेमाल करके अमेरिका ने एक अवैध शासक को अपराधी साबित कर दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले को जायज ठहराने में मदद मिले।
इस कदम से दुनिया की राजनीति की बिसात पर कई बड़े बदलाव लाएगा:
1- दुनिया भर के देश अब डरे हुए हैं। अगर अमेरिका किसी देश के राष्ट्रपति को उसके घर से उठा सकता है, तो अंतरराष्ट्रीय कानून और ‘देशों की आजादी’ के मायने क्या रह गए?
2- ये रूस और चीन के लिए झटका है। वेनेजुएला में रूस और चीन का अरबों डॉलर का निवेश लगा है। मादुरो के हटने से उनके रणनीतिक ठिकाने अब खतरे में हैं।
3- सरा क्षेत्रीय अस्थिरता- वेनेजुएला में अभी गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। भले ही अमेरिका वहां शासन चलाने की बात कर रहा है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर मादुरो के समर्थक और सेना का एक गुट विद्रोह कर सकता है।
और इन सबके चलते तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर दुनिया भर के देशों पर पड़ेगा और अमेरिका मालामाल हो जाएगा।









