लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर और जापान दौरे के बाद, अब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विदेशी निवेश को धरातल पर उतारने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) के बाद यह किसी भी भारतीय राज्य की पहली उच्च-स्तरीय यात्रा है। जर्मनी के न्यूरेम्बर्ग और फ्रैंकफर्ट में डिप्टी सीएम ने यूपी को एक ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ के रूप में पेश किया है, जिसका मुख्य लक्ष्य दुनिया की अत्याधुनिक तकनीक को उत्तर प्रदेश की जमीन पर लाना है।
क्वांटम सिस्टम्स के साथ रणनीतिक बैठक: 160 किमी रेंज वाले ड्रोन्स की तैयारी
इस दौरे की सबसे बड़ी खबर जर्मनी और इजराइल की अग्रणी कंपनी ‘क्वांटम टेक्नोलॉजीज’ के साथ हुई बैठक से निकलकर आई है।
- एडवांस तकनीक: बैठक में $160$ किलोमीटर की ऑपरेशनल रेंज वाले हाई-एल्टीट्यूड मानव रहित प्लेटफार्म (UAS) और ड्रोन्स पर चर्चा हुई। यह वही तकनीक है जिसका इस्तेमाल वर्तमान में जर्मनी और स्पेन की सेनाएं कर रही हैं।
- यूपी में मैन्युफैक्चरिंग: केशव मौर्य ने कंपनी को उत्तर प्रदेश में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और ‘रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) हब’ स्थापित करने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। यदि यह समझौता जमीन पर उतरता है, तो यूपी रक्षा उत्पादन और एयरोस्पेस के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन जाएगा।
- बहुआयामी उपयोग: इन ड्रोन्स का उपयोग केवल रक्षा ही नहीं, बल्कि कृषि, आपदा प्रबंधन, भू-सर्वेक्षण और कारागार सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकेगा।
70 हजार एकड़ का लैंड बैंक और एक्सप्रेस-वे का नेटवर्क
डिप्टी सीएम ने जर्मन निवेशकों को भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने प्रदेश की मजबूत बुनियादी संरचना का विवरण देते हुए बताया कि यूपी के पास $70,000$ एकड़ का बड़ा लैंड बैंक और एक्सप्रेस-वे का शानदार जाल है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा के साथ उन्होंने ‘न्यूरेम्बर्गमेसी समूह’ के सीईओ पीटर ओटमैन से भी मुलाकात की। इस दौरान उत्तर प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों के आयोजन और MSME क्षेत्र को वैश्विक मंच प्रदान करने पर सहमति बनी।
‘टेक्नोलॉजी-ड्रिवन’ ग्रोथ की ओर कदम
जर्मनी में हुई ये बैठकें केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने का एक ठोस ब्लूप्रिंट हैं। सेमीकंडक्टर, एआई (AI), और ड्रोन इकोसिस्टम को एकीकृत कर योगी सरकार एक ऐसा औद्योगिक ढांचा तैयार कर रही है, जो भविष्य की सुरक्षा और आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सके। अब देखना यह है कि जर्मनी के ये तकनीकी दिग्गज कितनी जल्दी लखनऊ और नोएडा के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में अपनी नींव रखते हैं।









