आप और हम जब अपने फोन पर एक क्लिक करते हैं, तो 10 मिनट के अंदर हमारे दरवाजे पर गर्मागर्म खाना या राशन पहुँच जाता है। हमें लगता है कि वाह! क्या System है, कितनी तरक्की कर ली है हमने। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी उस ’10 मिनट की खुशी’ के पीछे किसी की जान दांव पर लगी है? और उसके पीछे उन डिलीवरी बॉयज़ की हालत क्या है, ये कोई बी नहीं जानता और अगर आपके ऑर्डर में देर हो जाए तो लोग ऑर्डर जो देने आता है उसको बहुत सी बाते भी सुननी पड़ती है। इतना आसान नहीं होता है खुद का पेट पालना।
अब हो सकता है कि आप पार्टियों के लिए ऑर्डर बुक करें, और आपको सर्विस नॉट फाउंड मिले क्यों कि अब देश के लाखों डिलीवरी बॉयज यानी हमारे Gig Workers ने सड़कों पर उतरने का फैसला कर लिया है। क्योंक् उनकी सुनवाई कहीं नहीं है, शायद यही एक कारण है जो उन्होनें ये फैसला लिया है।

ऑनलाइन डिलीवरी बॉयज़ नें की हड़ताल
आपको बताते चले कि स्विगी, जोमैटो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के एक लाख से ज्यादा वर्कर हड़ताल पर उतर आए हैं। उसके पीछे का कारण है कि डिलीवरी बॉयज लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें कम पैसे मिलते हैं। काम ज्यादा है और सिक्योरिटी है ही नहीं। अगर वे 31 दिसंबर को काम बंद कर दें, तो इन कंपनियों के ऐप पर ऑर्डर तो धड़ाधड़ आएंगे, लेकिन सामान पहुंचाने वाला कोई नहीं होगा। नतीजतन, ग्राहक नाराज, और कंपनियों की कमाई पर पानी फिर जाएगा।
आइये आपको समझाते है डिलीवरी बॉयज़ के तकलीफ की स्टोरी
सबसे पहले बात करते हैं उस ’10 मिनट डिलीवरी मॉडल’ की, जिसने इस विवाद को हवा दी है। कंपनियों के बीच एक होड़ मची है—कौन सबसे तेज़ डिलीवरी देगा। लेकिन इस होड़ में पिस रहा है वो लड़का जो बाइक पर सवार होकर अपनी जान हथेली पर लिए भाग रहा है।इसी को लेकर हड़ताल कर रहे यूनियन्स का कहना है कि ये 10 मिनट का Pressure सड़कों पर हादसों की वजह बन रहा है। धूप हो, कड़कड़ाती ठंड हो या फिर मूसलाधार बारिश, इन वर्कर्स को बस घड़ी की सुइयां दिखती हैं। अगर देर हुई, तो Penalty लगती है या फिर ID Block कर दी जाती है। क्या किसी की भूख मिटाने की कीमत किसी की जान हो सकती है? यही वो सवाल है जो ये गिग वर्कर्स पूरे देश से पूछ रहे हैं। ये हड़ताल सिर्फ दिल्ली, मुंबई या हैदराबाद जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ, पटना और जयपुर जैसे शहरों में भी इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा मुद्दा है इन कंपनियों का Algorithm। वर्कर्स का आरोप है कि ये सिस्टम उनके साथ भेदभाव करता है। कभी किसी को ज़्यादा काम मिलता है, तो कभी कोई घंटों खाली बैठा रहता है। उन्हें काम के बीच में ब्रेक तक नहीं मिलता। ये वर्कर्स मांग कर रहे हैं कि उन्हें एक मशीन की तरह नहीं, बल्कि एक इंसान की तरह ट्रीट किया जाए। उन्हें सुरक्षा के लिए गियर्स दिए जाएं, उनके पेमेंट का स्ट्रक्चर साफ-सुथरा हो और सबसे ज़रूरी—कस्टमर्स और प्लेटफॉर्म्स से उन्हें ‘सम्मान’ मिले। वर्कर्स की मांगें बहुत बुनियादी हैं, लेकिन गहरी हैं।

डिलीवरी बॉयज़ की मांग
उनका कहना है कि आज इन लाखों वर्कर्स के पास न तो हेल्थ इंश्योरेंस है, न एक्सीडेंट कवर और न ही पेंशन। अगर काम के दौरान किसी के साथ अनहोनी हो जाए, तो कंपनियां हाथ खड़े कर लेती हैं। वहीँ दूसरी तरफ इनपर काम का बोझ बढ़ रहा है, पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन इन वर्कर्स की कमाई वहीं की वहीं रुकी हुई है। ऊपर से बिना किसी सुनवाई के इनकी आईडी ब्लॉक कर देना और भारी जुर्माना लगाना, उनके साथ एक किस्म का ‘डिजिटल अन्याय’ है। अब सवाल उठता है कि आखिर ये वर्कर्स चाहते क्या हैं? इसको लेकर इन्होंने बाकायदा 9 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जो सुनने में तो बहुत बेसिक लगती हैं, लेकिन आज के इस ‘डिजिटल सिस्टम’ में इनके लिए ये हक पाना पहाड़ तोड़ने जैसा है।उनकी सबसे पहली और बड़ी मांग है—10 मिनट डिलीवरी मॉडल को तुरंत बंद करना। वर्कर्स का साफ कहना है कि ये मॉडल उनके लिए ‘डेथ वारंट’ जैसा है। वो चाहते हैं कि एक साफ-सुथरा वेतन स्ट्रक्चर हो, ताकि उन्हें पता चले कि उनकी मेहनत का कितना हिस्सा उन्हें मिल रहा है और कितना कंपनी रख रही है।इतना ही नहीं, इनकी एक बड़ी समस्या है—बिना नोटिस के आईडी ब्लॉक कर देना। कंपनियों का एल्गोरिदम अगर किसी वर्कर से ज़रा भी नाराज़ हुआ, तो बिना किसी जांच के उसकी आईडी बंद कर दी जाती है। वर्कर्स चाहते हैं कि इस मनमानी पर रोक लगे। साथ ही, वो काम के दौरान फिक्स ब्रेक और फिक्स वर्किंग आवर्स की मांग कर रहे हैं। साथ ही उन्हें धूप, बारिश और ठंड में काम करने के लिए जरूरी सेफ्टी गियर दिए जाएं। और सबसे जरूरी—स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना कवर और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षाएं, जो हर कर्मचारी का हक होती है वह उन्हें मिले।

ज़रा सोचिए, जो लोग हमारे घर की हर ज़रूरत पूरी करते हैं, आज वो खुद अपनी सुरक्षा और सम्मान के लिए सड़क पर खड़े हैं। तो अब आप भी ध्यान रखियेगा कि अगली बार जब आप कोई ऑर्डर करें और वो 2 मिनट देर से पहुँचे, तो उन पर चिल्लाने के बजाय एक मुस्कुराहट दे दीजिएगा। क्योंकि वो सिर्फ आपका सामान नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी का एक हिस्सा लेकर आपके पास आए हैं।









