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“जयशंकर की दहाड़: ‘हमारा हाथ अब मजबूरी नहीं, आत्मरक्षा की ताकत है’, पाकिस्तान में मची खलबली!”

 

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम आतंकी हमले के घावों के बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब पुरानी नीतियों के भरोसे नहीं रहेगा। “क्या पाकिस्तान को लगता है कि वह सिंधु का पानी भी पिएगा और भारत की धरती पर खून भी बहाएगा? तो अब ऐसा होना नामुमकिन है, क्योंकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के सामने साफ कर दिया है कि भारत अब किसी बाहरी दबाव या पुराने समझौतों की बेड़ियों में नहीं बंधेगा। जब बात देश की सुरक्षा की होगी, तो भारत का जवाब ‘डिप्लोमेटिक’ नहीं, बल्कि ‘डिस्ट्रक्टिव’ होगा। जानिए जयशंकर के उस बयान के मायने, जिसने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है।”

विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. JAI SHANKAR) का पाक को कड़ा संदेश

आईआईटी मद्रास में एक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. JAI SHANKAR) ने पाकिस्तान को लेकर भारत के कड़े रुख को दोहराया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ढाका (बांग्लादेश) में उन्होंने पाकिस्तानी स्पीकर से शिष्टाचार मुलाकात की थी, जिसे पाकिस्तान अपनी ‘कूटनीतिक जीत’ बता रहा था।

जयशंकर के प्रहार के मुख्य बिंदु

  • आत्मरक्षा का संप्रभु अधिकार: जयशंकर ने स्पष्ट कहा, “आतंकवाद से निपटने के लिए भारत किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। हमें अपनी रक्षा करने का पूरा हक है और हम तय करेंगे कि हमें कब और कैसे प्रतिक्रिया देनी है।”
  • सिंधु जल संधि (IWT) और आतंकवाद: उन्होंने एक बहुत बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि आप हमसे यह उम्मीद नहीं कर सकते कि हम आपके साथ ‘पानी साझा‘ करें और आप हमारे देश में ‘आतंकवाद’ (terrorism) फैलाते रहें। यह दोनों चीजें अब साथ-साथ नहीं चल सकतीं।
  • कोई वार्ता नहीं: उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद (terrorism) पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक द्विपक्षीय बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है।


विदेश मंत्री ने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर साधा निशाना
कार्यक्रम के दौरान डॉ. जयशंकर से भारत की विदेश नीति को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘आपके पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं। अगर हम पश्चिम की तरफ देखें तो पता चलता है कि दुर्भाग्य से हमारे साथ भी ऐसा है। अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद फैलाता है तो हमारे पास भी आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार मौजूद है और हम उसका इस्तेमाल भी करेंगे, लेकिन ये हम पर है कि हम इसका कैसे इस्तेमाल करते हैं। कोई हमें ये नहीं बता सकता कि क्या करना चाहिए या क्या नहीं। अपनी सुरक्षा के लिए हम वो सबकुछ करेंगे, जो हमें करना चाहिए।’

‘ऑपरेशन सिंदूर’ और 2025 का तनाव

यह कड़ा रुख अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पैदा हुआ है। जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’(OPERATION SINDOOR) चलाया था, जिसमें पाकिस्तान (PAKISTAN) के 11 सैन्य ठिकानों और एयरबेस (AIR BASE) को भारी नुकसान पहुंचाया गया था। जयशंकर ने याद दिलाया कि भारत ने अपनी ताकत दिखा दी है और भविष्य में भी किसी भी दुस्साहस का परिणाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से भी अधिक भयानक होगा।

वर्तमान कूटनीतिक स्थिति

हालांकि हाल ही में ढाका में जयशंकर ने पाकिस्तानी नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक से हाथ मिलाया था, लेकिन उन्होंने आज साफ कर दिया कि वह केवल एक ‘शिष्टाचार‘ था, भारत की नीति में कोई नरमी नहीं आई है। पाकिस्तान फिलहाल आर्थिक तंगहाली और आंतरिक अशांति (बलूचिस्तान संकट) के बीच भारत से बातचीत की भीख मांग रहा है, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है।

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