बिहार विधानसभा परिणाम के बाद से बिहार की राजनीति में हलचल मची हुई है। विपक्षी गठबंधन को करारी हार मिलने के बाद सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, क्योंकि बिहार में अभी कुछ दिन पहले एक खबर ये भी थी कि RJD के करीब 25 विधायक बीजेपी में शामिल होने वाले हैं, और अब खबर आ रही है कि कांग्रेस नेता शतील अहमद खान ने राजद से गठबंधन तोड़ने की बात कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता शकील अहमद खान बयान
बिहार विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता रह चुके सीनियर लीडर शकील अहमद खान ने महागठबंधन को लेकर बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने कहा है कि बिहार में महगठबंधन बचा नहीं है। कांग्रेस को राजद के साथ रहने का न तो कोई चुनावी फायदा है और न संगठनात्मक फायदा है। उल्टे कांग्रेस को इससे नुकसान ही हो रहा है।

मीडिया से बातचीत में कांग्रेस नेता ने कहा कि बिहार चुनाव के बाद विश्लेषणात्मक अध्ययन के लिए दिल्ली में मंथन हुआ। उसमें मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी समेत तमाम सीनियर नेता थे। उसमें बिहार में चुनाव लड़ने वाले सभी 60 कैंडिडेट और वरिष्ठ नेताओं की राय यह बनी कि जिस काम से लाभ नहीं है। जिस एलायंस से लाभ नहीं है। उसे छोड़ देना चाहिए। अलग राह बनानी चाहिए। हालांकि यह आसानी से नहीं बनेगा। इसके लिए संघर्ष करना होगा।

क्योंकि उसके पीछे का सबसे बड़ा कारण ये रहा कि कांग्रेस की न तो सीटों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। वोट के आधार में भी बढ़ोतरी नहीं हो रही है। वोट देने वाले की संख्या हमारे पक्ष में कम होती जा रही है। शीर्ष नेतृत्व राज्य इकाई की बात सुनता है। हम अपनी राह बनाएंगे।
साख को धक्का लगता है- शकील अहमद खान
कांग्रेस नेता शकील अहमद खान यहीं नहीं रुके। उन्होंने ये भी कह दिया है कि “राजद से रिश्ता रखने पर साख (कांग्रेस की) को धक्का लगता है। नॉन यादव, ओबीसी, EBC जातियां दूर हो जाती हैं। मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम उम्मीदवार बनाया गया जिसका परफॉरमेंस जीरो है, जिसने कभी चुनाव जीता ही नहीं। इस वजह से जो वोट देने वाले थे वे भी दूर हो गए।”

तेजस्वी यादव को देनी चाहिए थी प्राथमिकता
कांग्रेस नेता शकील ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की भूमिका पर भी सवाल उठा दिया। उनकी विदेश यात्रा पर कहा कि जनता को उनसे एक मजबूत नेता प्रतिपक्ष की उम्मीद है। वे सरकार को हर मुद्दे पर घेरें और जनता की आवाज बने, लेकिन उनकी भूमिका में कमी देखी जा रही है। वर्तमान में राज्य बेरोज़गारी, शिक्षा, कानून व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। ऐसे समय में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में तेजस्वी यादव को पहले अपनी इन जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना चाहिए था। लेकिन विपक्ष कमजोर भूमिका में है। इसका सीधा फायदा सत्ताधारी दलों को मिल रहा है।
कांग्रेस ने जब भी राज्य के में रिज़नल पार्टी के साथ गठबंधन किया वहां पर या तो कांग्रेस गर्त में गई या फिर उसके साथ वहां की रिज़नल पार्टी। अब बिहार में भी कांग्रेस और राजद को लेकर कांग्रेस नेता का बयान सामने आया है। अब देखना है कि राहुल और तेजस्वी कब तक साथ रहते हैं।









