जब दुनिया की महाशक्तियाँ वेनेजुएला की संप्रभुता और सत्ता परिवर्तन के खेल में उलझी हैं, तब भारत के ‘संकटमोचक’ कहे जाने वाले एस. जयशंकर ने लक्जमबर्ग की धरती से वाशिंगटन तक कड़ा संदेश भेज दिया है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद भारत की ‘खामोशी’ टूटी है और जो आवाज़ निकली है, उसने अंतरराष्ट्रीय पाखंड की धज्जियां उड़ा दी हैं।
वेनेजुएला में मचे भारी उथल-पुथल और अमेरिकी सेना द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर भारत ने अपनी पहली बड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बेहद सधे हुए लेकिन कड़े शब्दों में दुनिया को भारत का स्टैंड साफ कर दिया है।

क्या कहा विदेश मंत्री ने?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वेनेजुएला के घटनाक्रम पर ‘गहरी चिंता’ व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता वहां के ‘लोगों की सुरक्षा और भलाई’ है। जयशंकर ने लक्जमबर्ग में अपने समकक्ष जेवियर बेटेल के साथ बैठक के बाद कहा, “वेनेजुएला के साथ हमारे सालों से अच्छे संबंध रहे हैं। हम चाहते हैं कि वहां के लोग इस संकट से सुरक्षित बाहर निकलें।”
जयशंकर ने इशारों-इशारों में अमेरिका और पश्चिमी देशों की ‘मुफ्त सलाह’ वाली नीति पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जो देश दूसरों को शांति का पाठ पढ़ाते हैं, वे खुद अपने हितों के लिए किसी भी सीमा तक चले जाते हैं। भारत ने साफ किया है कि किसी भी देश की समस्या का समाधान ‘बाहरी हमले’ से नहीं बल्कि ‘शांतिपूर्ण संवाद’ से होना चाहिए।

लक्जमबर्ग के साथ द्विपक्षीय वार्ता
भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने लक्जमबर्ग के उप प्रधान मंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद ये बयान दिया। हालांकि, इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला के हालातों पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से शांति स्थापित करने की अपील की थी।
विदेश मंत्रालय ने जारी किया था हेल्पलाइन नंबर
विदेश मंत्रालय ने कहा था कि काराकास स्थित दूतावास वेनेजुएला में रहने वाले सभी भारतीयों के संपर्क में बना हुआ है। साथ ही उन्होंने भारतीयों से कुछ समय के लिए वेनेजुएला की यात्रा न करने की अपील की थी। विदेश मंत्रालय ने भारतीयों के लिए इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर +58-412-9584288 भी जारी किया था।
वेनेजुएला संकट: अब तक क्या हुआ?
- 3 जनवरी 2026: अमेरिकी विशेष बलों ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत काराकास में आधी रात को हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया।
- ट्रंप का एक्शन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो पर ‘नार्को-टेररिज्म’ (नशीली दवाओं के व्यापार) का आरोप लगाया है और उन्हें न्यूयॉर्क की जेल में रखा गया है।
- भारत का स्टैंड: भारत ने इस सैन्य कार्रवाई की सीधी निंदा करने के बजाय ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) का पालन किया है, ताकि अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों पर असर न पड़े और वैश्विक सिद्धांतों की रक्षा भी हो सके।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह मुद्दा?
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत का आयात कम हुआ है, लेकिन भारतीय कंपनियां जैसे ONGC का वहां करोड़ों डॉलर का निवेश फंसा हुआ है। भारत चाहता है कि वहां स्थिरता आए ताकि फंसी हुई रकम और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।









