कफ सिरप को लेकर उत्तर प्रदेश में कुछ वक़्त से हंगामा मचा हुआ है। जिसको लेकर विपक्ष पूरी तरह से सरकार पर हमलावर नज़र आ रहा है। विधानसभा के शीतकालिन सत्र में भी विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा था। जिसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभालते हुए विपक्ष के हर सवाल के जवाब दिए थे। अब इसी को लेकर सीएम योगी ने कोडीन सिरप पर के पूरी चेन को ध्वस्त करने का काम किया है।
योगी सरकार ने पिछले पौने नौ वर्षों में अवैध नशे के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की है। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ एक्शन ने अवैध नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी है।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) को कोडिनयुक्त कफ सिरप एवं एनडीपीएस श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण तथा अवैध डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिये। इस पर तीन माह पहले अभियान शुरू किया।

कफ सिरप को लेकर कई प्रदेशों में सर्च ऑपरेशन
कई प्रदेशों में पड़ताल की गई और सुपर स्टॉकिस्ट के साथ होलसेलर के कारोबारी रिश्तों के सबूत जुटाए। विभाग ने कोडिनयुक्त कफ सिरप के अवैध डायवर्जन को लेकर देश का सबसे बड़ा क्रैक डाउन शुरू करने से पहले अंदरुनी गहन जांच शुरू की।
इस दौरान झारखंड, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड जैसे राज्यों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया और यूपी के सुपर स्टॉकिस्ट और होलसेलर के साथ उनके कारोबारी रिश्तों के सबूत जुटाए। इसके बाद प्रदेश में क्रैक डाउन शुरू हुआ, जिसने सिरप के अवैध डायवर्जन की परतें उधेड़ दीं।
FSDA की रिपोर्ट पर एक्शन
एफएसडीए की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और एसटीएफ ने नशे के सौदागरों को दबोचने के लिए एक्शन शुरू किया। सीएम के निर्देश पर सिरप का नशे के रूप में इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ एनडीपीएस और बीएनएस के तहत मुकदमे दर्ज किये गये।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा चलाने को सही ठहराते हुए 22 मामलों में आरोपियों की रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने 22 मामलों में आरोपियों द्वारा अरेस्ट स्टे की रिट याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। 52 जनपदों में 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की गई।

मामले की तह तक पहुंची एफएसडीए और पकड़ में आया पूरा नेक्सेज
एफएसडीए आयुक्त ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए जनपद स्तर पर कई टीमें बनाईं। टीमों की निगरानी के लिए मुख्यालय पर एक टीम बनाई गई। विभिन्न टीमें जांच के लिए विभिन्न प्रदेशों में गई और गोपनीय तरीके से साक्ष्य जुटाए। टीम ने केंद्रीय नॉरकोटिक्स ब्यूरो, ग्वालियर, मध्य प्रदेश से कोडीन फॉस्फेट का कोटा एवं उठान के विवरण को एकत्रित किया।
वहीं टीम ने कोडिनयुक्त कफ सिरप निर्माता फर्मों की जांच के लिए हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड गई। यहां से सिरप के निर्माण और वितरण से संबंधित अभिलेख जुटाए। इसके बाद सिरप के क्रय विक्रय अभिलेख के लिए रांची, दिल्ली और लखनऊ का रूख किया।
इस दौरान पाया गया कि अधिकांश होलसेल के पास स्टॉक पहुंचने का सत्यापन नहीं है और रिटेल मेडिकल स्टोर के नाम पर कोई भी विक्रय बिल नहीं मिला जबकि दिल्ली, रांची के सुपर स्टॉकिस्ट और इनसे जुड़े कुछ चिन्हित होल सेलर के नाम पर बिलिंग करके सिरप के साथ एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं की एक सामानान्तर वितरण श्रृखंला बनायी गयी।
बता दें कि ये पूरा मसला मध्य प्रदेश से शूरु हुआ था, जहं पर 20 से ज़्यादा बच्चों की सिरप पीने से मौत हो गई थी, उसके बाद से कफ सिरप को लेकर जांच शूरु होती है और उसके तार यूपी के पूर्वांचल से जुड़े पाए जाते हैं। बस फिर क्या था विपक्ष को एक और मुद्दा मिल गया सरकार को घेरने का और धीरे-धीरे इसके पूरे नेक्सस पर योगी सरकार नें काम शूरु किया और इस पूरे प्रकरण में सरकार ने लगभग सभी को अरेस्ट कर लिया है लेकिन इसका सरगला अभी भी पुलिस की गिर्फत से दूर है।









