Dharmendra Pradhan Controversy: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस समय चौतरफा मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इस पूरे विवाद की शुरुआत कुछ महीने पहले सिर्फ एक परीक्षा में हुई गड़बड़ी से हुई थी, लेकिन अब यह मामला बहुत बड़ा रूप ले चुका है। देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक के बाद एक कई नए विवाद सामने आने की वजह से उन पर पद छोड़ने का राजनीतिक दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। विपक्ष से लेकर कई छात्र संगठन और देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग सड़कों पर उतरकर उनका विरोध कर रहे हैं।
एक के बाद एक लीक और रद हुईं बड़ी परीक्षाएं
देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित परीक्षाओं पर पिछले कुछ समय में बहुत गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इन गड़बड़ियों की वजह से लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है:
- NEET पेपर लीक: मेडिकल की इस बड़ी परीक्षा में हुई धांधली का मामला देशभर में फैल गया और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। जांच एजेंसियां इस पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
- UGC-NET परीक्षा रद: NEET का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि सरकार को खुद पेपर की गोपनीयता खत्म होने की बात माननी पड़ी और UGC-NET परीक्षा को रद करना पड़ा।
- CUET परीक्षा में दिक्कतें: इसके तुरंत बाद यूनिवर्सिटी एडमिशन के लिए होने वाली CUET परीक्षा में भी तकनीकी खराबी और देरी की कई शिकायतें सामने आईं।
जंतर-मंतर से बेंगलुरु तक छात्रों का भारी विरोध
इन लगातार होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों और सामाजिक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी नाम के एक संगठन का आंदोलन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है। इस संगठन के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक लगातार धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच पहचान पत्र मांगने को लेकर थोड़ी बहस भी हुई, जिससे यह आंदोलन और ज्यादा सुर्खियों में आ गया। दिल्ली के बाद यह विरोध प्रदर्शन बेंगलुरु पहुंचा, जहां भारी बारिश के बाद भी बड़ी संख्या में छात्र इकट्ठा हुए। इस आंदोलन को मशहूर अभिनेता प्रकाश राज और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जैसे बड़े चेहरों का भी साथ मिला। इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन के चढूनी गुट ने भी छात्रों की इस लड़ाई को अपना समर्थन दिया है। वहीं चंडीगढ़ में भी युवाओं ने शिक्षा मंत्री को काले झंडे दिखाए।
क्या है CBSE का नया ओएसएम विवाद?
अभी पुरानी परीक्षाओं का विवाद पूरी तरह थमा भी नहीं था कि दसवीं और बारहवीं के नतीजों के बाद एक नया डिजिटल संकट सामने आ गया। यह नया विवाद CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम सिस्टम से जुड़ा है। रिजल्ट आने के बाद बहुत से छात्रों ने शिकायत की कि उनकी आंसर शीट्स के जो स्कैन पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं, वे बेहद धुंधले हैं और कुछ पन्ने तो गायब ही हैं। इसके अलावा जब छात्रों ने नंबर दोबारा जांचने के लिए अप्लाई करना चाहा, तो वेबसाइट का पोर्टल बार-बार क्रैश होता रहा। विपक्ष ने इस मामले को लपकते हुए आरोप लगाया कि इस पूरे डिजिटल सिस्टम के टेंडर और सुरक्षा में बड़ी लापरवाही बरती गई है।
अफसरों का हुआ ट्रांसफर, लेकिन राहुल गांधी ने उठाए सवाल
इस नए विवाद के बढ़ते ही शिक्षा मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सेक्रेटरी हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया। उनकी जगह नए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है और पूरे टेंडर की जांच के लिए एक कमेटी भी बना दी गई है।
लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस कार्रवाई से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने सीधे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा है। राहुल गांधी का कहना है कि सिर्फ अधिकारियों को हटाकर असली जिम्मेदारी से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मांग की कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया जाता और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक छात्रों को इंसाफ नहीं मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों छात्रों के भविष्य की परवाह किए बिना इस पूरे प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट देने में नियमों की अनदेखी की गई थी।
आगे क्या होगा?
इस समय स्थिति यह है कि शिक्षा मंत्री कई मोर्चों पर एक साथ घिरे हुए हैं। एक तरफ NEET और NET परीक्षाओं का विवाद है, तो दूसरी तरफ CBSE के नए ओएसएम सिस्टम ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दिल्ली, बेंगलुरु और चंडीगढ़ जैसे शहरों में हो रहे प्रदर्शनों ने इस मामले को राजनीतिक रूप से बहुत गरमा दिया है। हालांकि सरकार का कहना है कि वह हर गड़बड़ी की जांच करा रही है और सिस्टम को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा, लेकिन विपक्ष अब सिर्फ जांच के वादों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।









