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Badrinath Temple Donation Theft Case: बद्रीनाथ मंदिर दान चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई; SIT ने पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान को किया गिरफ्तार!

Badrinath Temple Donation Theft Case

Badrinath Temple Donation Theft Case: उत्तराखंड के प्रसिद्ध धाम बद्रीनाथ मंदिर से आ रही एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर ने पूरे देश के श्रद्धालुओं और प्रशासनिक महकमे को हिलाकर रख दिया है। बद्रीनाथ मंदिर के कथित दान चोरी मामले (Badrinath Temple Donation Theft Case) में विशेष जांच दल (SIT) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए मंदिर के पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान को गिरफ्तार कर लिया है।

शुक्रवार, 17 जुलाई को एसआईटी ने राजेंद्र चौहान से करीब चार घंटे तक कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। आरोपी राजेंद्र चौहान को कल यानी 18 जुलाई को कोर्ट में पेश किया जाएगा। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी अधिकारी अभी पिछले महीने ही यानी 30 जून को अपने पद से रिटायर हुए थे, और रिटायरमेंट के महज 17 दिनों के भीतर ही वे सलाखों के पीछे पहुंच गए हैं।

पद का दुरुपयोग और दान की रकम गायब करने का गंभीर आरोप

Badrinath Temple Donation Theft Case: राजेंद्र चौहान पर आरोप है कि उन्होंने मंदिर अधिकारी के पद पर तैनात रहते हुए अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। उन्होंने मंदिर के स्थापित नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर दान पेटियों (Donation Boxes) से आने वाली भारी-भरकम चढ़ावे की रकम को धीरे-धीरे और बेहद शातिराना तरीके से गायब कर दिया।

इस सुनियोजित खेल का खुलासा तब हुआ जब हाल ही में बद्रीनाथ मंदिर के ऑडिट के दौरान भारी वित्तीय गड़बड़ियां और विसंगतियां पाई गईं। ऑडिट में दान चोरी की खबरें जैसे ही सार्वजनिक हुईं, पूरे मंदिर प्रबंधन और उत्तराखंड शासन में हड़कंप मच गया। इसके तुरंत बाद ही उत्तराखंड पुलिस की एसआईटी ने इस संवेदनशील मामले की बागडोर अपने हाथों में ली थी।

कैसे खुला यह पूरा राज? 2 जुलाई से शुरू हुई घटनाक्रम की कड़ियां

Badrinath Temple Donation Theft Case: इस पूरे मामले की परतें खुलना 2 जुलाई को शुरू हुआ था, जब बद्रीनाथ मंदिर में दान चोरी का पहला मामला आधिकारिक तौर पर सामने आया। स्थानीय धार्मिक संगठन ‘भैरव सेना’ की लिखित शिकायत के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) हरकत में आई। समिति ने मंदिर के अंदर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगालने का फैसला लिया।

सीसीटीवी फुटेज सामने आते ही जांच अधिकारियों के होश उड़ गए। फुटेज में मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल दान की नकदी गिनने के दौरान वहां से कैश और सोने-चांदी के कीमती सिक्के चुपके से अपने बैग और जेब में भरते हुए साफ दिखाई दिया। सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि इस संवेदनशील गिनती के दौरान नियमों के उलट वहां कोई अन्य जिम्मेदार कर्मचारी या सुरक्षा अधिकारी मौजूद नहीं था।

प्रमोद नौटियाल का निलंबन, FIR और 3-सदस्यीय SIT का गठन

Badrinath Temple Donation Theft Case: सीसीटीवी फुटेज में चोरी की लाइव वारदात दिखने के बाद मंदिर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। 4 जुलाई को एक विशेष आंतरिक जांच समिति का गठन किया गया और आरोपी प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद 8 जुलाई को बदरीनाथ थाने में उसके खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने तुरंत तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया और टीम को हर हाल में 15 दिनों के भीतर अपनी प्राथमिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। जांच शुरू होते ही पुलिस ने आरोपी प्रमोद नौटियाल के घर पर छापेमारी कर उसका लैपटॉप, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए। साथ ही कई महीनों का सीसीटीवी बैकअप भी कब्जे में ले लिया।

देहरादून से पहली गिरफ्तारी और मामले पर शुरू हुई तीखी राजनीति

एसआईटी की ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद 12 जुलाई की रात मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस कस्टडी में प्रमोद से लंबी पूछताछ की गई, हालांकि वह लगातार खुद को बेकसूर बताता रहा और जांच को भटकाने की कोशिश करता रहा। लेकिन डिजिटल सबूतों और फुटेज के सामने उसके दावे टिक नहीं सके।

इस बीच, इस महाघोटाले पर उत्तराखंड में सियासी पारा भी चढ़ गया। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार और मंदिर प्रबंधन को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बिना उच्च स्तरीय सांठगांठ के इतनी बड़ी चोरी मुमकिन नहीं है, इसलिए पूरे मामले की अदालती निगरानी में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि बड़े चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

राजेंद्र चौहान की गिरफ्तारी से साफ हुआ नेक्सस: आस्था के साथ बड़ा खिलवाड़

प्रमोद नौटियाल से मिली लीड्स और जब्त दस्तावेजों के फॉरेंसिक मिलान के बाद आखिरकार शुक्रवार (17 जुलाई) को एसआईटी ने पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान को भी दबोच लिया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में यह दूसरी सबसे बड़ी गिरफ्तारी है। जांच अधिकारियों को संदेह है कि राजेंद्र चौहान ही इस पूरे दान चोरी रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड या मददगार थे, जिनकी शह पर यह खेल लंबे समय से चल रहा था।

इस सनसनीखेज खुलासे ने बदरी-केदार मंदिर समिति के सुरक्षा दावों, आंतरिक ऑडिट सिस्टम और प्रबंधन की भारी लापरवाही को सरेआम उजागर कर दिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं के पसीने की कमाई और उनकी अगाध आस्था के प्रतीक चढ़ावे के साथ हुए इस खिलवाड़ से देवभूमि के लोगों और भक्तों में भारी आक्रोश है। लोग अब मांग कर रहे हैं कि इस मंदिर के पूरे सुरक्षा ढांचे को नए सिरे से पारदर्शी बनाया जाए।

पारदर्शिता और कड़े प्रशासनिक ऑडिट की जरूरत

बद्रीनाथ धाम जैसे पावन और वैश्विक आस्था के केंद्र में हुई यह चोरी यह साबित करती है कि धार्मिक ट्रस्टों के भीतर मैनुअल कैश हैंडलिंग और ढीली सुरक्षा व्यवस्था कितनी बड़ी कमजोरी बन सकती है। Badrinath Temple Donation Theft Case की यह जांच अब एक बड़े प्रशासनिक रिफॉर्म की तरफ बढ़ रही है।

एसआईटी की इस त्वरित और कड़ी कार्रवाई से जनता में यह संदेश जरूर गया है कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा। अब सबकी नजरें कल यानी 18 जुलाई को होने वाली कोर्ट की सुनवाई और आरोपियों से होने वाली आगे की पूछताछ पर टिकी हैं, जिससे इस सिंडिकेट के कुछ और बड़े नामों का खुलासा होने की पूरी उम्मीद है।

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