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मध्य प्रदेश विधानसभा में UCC बिल पास, भारी हंगामे के बीच ध्वनि मत से मिली मंजूरी; CM मोहन यादव ने बताया ‘स्वर्णिम अध्याय’

Madhya Pradesh Assembly passes UCC Bill

Madhya Pradesh Assembly passes UCC Bill: मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच ‘मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। उत्तराखंड, असम और गोवा के बाद मध्य प्रदेश देश का चौथा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब इस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह पूरे राज्य में कानून के रूप में लागू हो जाएगा।

Madhya Pradesh Assembly passes UCC Bill: सीएम मोहन यादव बोले- ‘प्रदेश के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय’

विधेयक के पारित होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे प्रदेश के इतिहास का “स्वर्णिम अध्याय” बताया है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक कानून ‘एक राष्ट्र, एक संविधान, एक ध्वज, एक नेता’ के राष्ट्र के मूलभूत सिद्धांत को सुदृढ़ करता है।

कांग्रेस विधायकों के विरोध के बावजूद विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया। विधायकों ने विधेयक को एक चयन समिति को भेजने की मांग की और इसके बजाय 27% ओबीसी आरक्षण की वकालत की। वहीं, मुख्यमंत्री यादव ने कानून के ऐतिहासिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह कानून भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे राष्ट्रीय दिग्गजों से प्रेरणा लेता है। (Madhya Pradesh Assembly passes UCC Bill)

सरकार का दावा- बहुविवाह और भेदभाव पर लगेगी रोक

सीएम ने कहा, “समान नागरिक संहिता विधेयक का पारित होना मध्य प्रदेश के 85 करोड़ लोगों के लिए सचमुच एक सुनहरा दिन है… मध्य प्रदेश विधानसभा में इस कानून का पारित होना डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा प्रतिपादित ‘एक राष्ट्र, एक संविधान, एक ध्वज, एक नेता’ के दृष्टिकोण के प्रति हमारी सच्ची प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम महिलाओं को बहुविवाह से होने वाले कष्टों से मुक्ति दिलाएगा और उनके अधिकारों के लिए सरकारी समर्थन सुनिश्चित करेगा। मैं पूरे राज्य को बधाई देना चाहता हूं और कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहता हूं, ‘वे हमेशा हिंदू और मुसलमानों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश क्यों करते हैं?’ कांग्रेस की इसी गलत मानसिकता के कारण स्वतंत्रता के समय देश का विभाजन हुआ था।”

यादव ने जोर देते हुए कहा कि इस कदम से महिलाओं को बहुविवाह के कारण होने वाली पीड़ा से मुक्ति मिलेगी और उनके अधिकारों के लिए सरकारी समर्थन सुनिश्चित होगा। विपक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए यादव ने नागरिक एकरूपता पर कांग्रेस पार्टी के ऐतिहासिक रुख पर सवाल उठाया और उन पर विभाजनकारी राजनीति में लिप्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मैं पूरे राज्य को बधाई देना चाहता हूं और कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहता हूं कि वे हमेशा हिंदू और मुसलमानों के बीच फूट डालने की कोशिश क्यों करते हैं? कांग्रेस की यही कुटिल मानसिकता स्वतंत्रता के समय देश के विभाजन का कारण बनी थी।” (Madhya Pradesh Assembly passes UCC Bill)

कांग्रेस ने कहा- युवाओं की प्राथमिकता कुछ और…

यह कानून राज्य में सभी धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक एकल, समान नागरिक ढांचा स्थापित करता है। इसी बीच, कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि युवा इसके बजाय एक समान शिक्षा संहिता और एक समान स्वास्थ्य संहिता चाहते हैं।

सिंह ने कहा, “यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भाजपा सरकार का रवैया बेहद आपत्तिजनक है। राज्य और देश के युवा कह रहे हैं कि उन्हें यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं चाहिए। इसके बजाय, उन्हें यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड और यूनिफॉर्म हेल्थ कोड चाहिए।” उन्होंने मध्य प्रदेश में यूसीसी को लागू करने की आवश्यकता पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “क्या मुख्यमंत्री को यूसीसी को राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू करने के संबंध में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है कि वह इसे यहां लागू कर रहे हैं?” (Madhya Pradesh Assembly passes UCC Bill)

कांग्रेस ने संवैधानिक प्रक्रिया पर जताई आपत्ति

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित होने की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि संवैधानिक और संसदीय मानदंडों का सम्मान नहीं किया जा रह। है। मसूद ने कहा, “संशोधन पर चर्चा हुई। अवसर दिया गया। मैंने अपने प्रस्ताव रखे… हालांकि, दो घंटे बाद यह स्पष्ट हो गया कि यहाँ सरासर हठधर्मिता बरती जा रही है। न तो संविधान का पालन किया जा रहा है और न ही संसदीय नियमों का। उनका एकमात्र उद्देश्य विधेयक को पारित कराना था।”

महिलाओं की सुरक्षा और समानता का दावा

राज्य मंत्रिमंडल मंत्री विश्वास सारंग ने इस ऐतिहासिक कदम की सराहना करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह कानून समानता सुनिश्चित करेगा, महिलाओं को उत्पीड़न से बचाएगा और समाज की प्रतिगामी प्रथाओं को समाप्त करेगा। सारंग ने कहा, “मध्य प्रदेश में महिलाओं को अब अत्याचार या उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा। कोई भी पुरुष चार बार शादी नहीं कर सकेगा और हलाला जैसी दकियानूसी प्रथाएं समाप्त हो जाएंगी। पूरे राज्य में एकरूपता और समानता कायम होगी।” (Madhya Pradesh Assembly passes UCC Bill)

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह कानून समुदाय की परवाह किए बिना सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों की गारंटी देता है, और इस प्रकार राज्य को एक एकीकृत नागरिक ढांचे की दिशा में व्यापक राष्ट्रीय प्रयासों के साथ जोड़ता है।

यूसीसी विधेयक के मुख्य प्रावधान

विधेयक में सभी नागरिकों के लिए समान कानून और लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए अहम प्रावधान किए गए हैं।

  • बहुविवाह और हलाला पर रोक: राज्य में अब एक से अधिक विवाह मान्य नहीं होगा और निकाह-हलाला जैसी प्रथाएं दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएंगी।
  • पंजीकरण अनिवार्य: सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन ग्रामीण स्तर तक अनिवार्य कर दिया गया है। मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायतों के फैसलों को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित किया गया है।
  • लिव-इन रिलेशनशिप के नियम: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। इसके लिए पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • समान उत्तराधिकार अधिकार: संपत्ति पर बेटा और बेटी दोनों को समान अधिकार मिलेगा। विवाहित या अविवाहित माता-पिता के जैविक या गोद लिए गए बच्चों को भी समान कानूनी दर्जा मिलेगा।
  • आदिवासी समाज को छूट: राज्य की बड़ी जनजातीय आबादी को ध्यान में रखते हुए आदिवासी समाज को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। (Madhya Pradesh Assembly passes UCC Bill)

सदन में विपक्ष का कड़ा विरोध

मानसून सत्र के दूसरे दिन इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष ने इस विधेयक को विस्तृत चर्चा के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की थी, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण और आदिवासी विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सदन के बीच में आकर नारेबाजी की, जिसके कारण कार्यवाही को दो बार स्थगित भी करना पड़ा। हालांकि, भाजपा सरकार ने बहुमत के बल पर इसे ध्वनि मत से पास करा लिया।


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