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दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर मेदांता शिफ्ट हुए सोनम वांगचुक, स्वास्थ्य पर डॉक्टरों की कड़ी निगरानी

Sonam Wangchuk Shifted to Medanta

Sonam Wangchuk Shifted to Medanta: दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। उन्हें मंगलवार, 21 जुलाई 2026 की शाम करीब 7:25 बजे मेदांता में भर्ती कराया गया। नीट (NEET) पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। तबीयत बिगड़ने के बाद 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था।

Sonam Wangchuk Shifted to Medanta: पत्नी की याचिका पर हाईकोर्ट का आदेश, मेदांता शिफ्ट करने के निर्देश

वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सफदरजंग अस्पताल में उन पर पुलिस की सख्त निगरानी थी और मोबाइल तक इस्तेमाल नहीं करने दिया जा रहा था। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की दो जजों की पीठ ने 21 जुलाई 2026 को सुनवाई करते हुए वांगचुक के मौलिक अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा के लिए उन्हें तुरंत मेदांता शिफ्ट करने का आदेश दिया।

स्वास्थ्य पर गंभीर असर, पैनसाइटोपेनिया और कम पोटैशियम से बढ़ी चिंता

डॉक्टरों के मुताबिक भूख हड़ताल की वजह से उनके शरीर में पोटैशियम का स्तर गिरने और व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC) की संख्या कम होने (पैनसाइटोपिनिया) के कारण लगातार मेडिकल निगरानी की जरूरत है। डिस्चार्ज के समय उनके वाइटल पैरामीटर स्थिर पाए गए। हालांकि, पैनसाइटोपेनिया की स्थिति अभी भी बनी हुई है। वहीं, सीरम पोटैशियम स्तर 3.4 mEq/L दर्ज किया गया। (Sonam Wangchuk Shifted to Medanta)

NEET पेपर लीक के विरोध में 28 जून से जारी है आमरण अनशन

सोनम वांगचुक ने NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन के समर्थन में 28 जून 2026 से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। प्रदर्शनकारी NEET-UG परीक्षा पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

यह आंदोलन सोशल मीडिया के व्यंग्यात्मक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले चलाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत मई 2026 में पेपर लीक के बाद हुई थी। अनशन के 21वें दिन (18 जुलाई 2026 को) डॉक्टरों द्वारा वांगचुक के अंगों के खराब होने की आशंका जताए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। (Sonam Wangchuk Shifted to Medanta)

जंतर-मंतर से हटाने के बाद भी नहीं टूटा अनशन, दवा और ड्रिप लेने से इनकार

अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी सोनम वांगचुक ने अपना अनशन नहीं तोड़ा है और दवाओं या ड्रिप (IV fluids) को लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वे तब तक अनशन जारी रखेंगे जब तक छात्र नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने नहीं दिया जाता। वांगचुक को हटाए जाने के बाद भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन थमा नहीं है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा समेत कई अन्य छात्र लगातार वहां भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।

विपक्षी नेताओं और अन्ना हजारे ने भी दिया आंदोलन को समर्थन

इस बीच, विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं जैसे कांग्रेस के सचिन पायलट और आम आदमी पार्टी (AAP) के मनीष सिसोदिया ने जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया है और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई है। इसके अलावा, दिग्गज सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे वांगचुक के सब्र की परीक्षा न लें और प्रदर्शनकारियों से तुरंत बातचीत शुरू करें। (Sonam Wangchuk Shifted to Medanta)


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