Ram Rahim Parole: 25 अगस्त 2026 की सुबह रोहतक की सुनारिया जेल से राम रहीम एक बार फिर 21 दिन की फरलो पर बाहर आ चुका है। कड़ी सुरक्षा के बीच उसे सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय पहुंचाया गया। 2017 में दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काटने के दौरान यह उसकी 17वीं और साल 2026 की तीसरी Temporary Release है।
इतने गंभीर अपराध में सजा काट रहे किसी कैदी को बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति कैसे मिल जाती है, इसे लेकर जनमानस और राजनीति में बहस छिड़ गई है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पैरोल और फरलो का कानूनी गणित क्या है, यह निर्णय कौन लेता है और राम रहीम का मामला इतना विवादित क्यों है।
1. पैरोल और फरलो में अंतर (Parole vs Furlough)
जेल प्रणाली में दोनों का उद्देश्य कैदी को समाज और परिवार से जोड़े रखना है, लेकिन दोनों के कानूनी आधार अलग हैं:
- पैरोल (Parole): यह कैदी की किसी विशेष मजबूरी या आवश्यकता (जैसे परिवार में बीमारी, शादी या मृत्यु) पर दी जाती है। पैरोल देना या न देना प्रशासन के विवेक पर निर्भर करता है, यह कैदी का अधिकार नहीं है।
- फरलो (Furlough): यह दीर्घकालिक सजा काट रहे कैदी को उसके जेल में अच्छे व्यवहार (Good Conduct) के आधार पर दी जाती है। यदि कैदी ने जेल के नियमों का पालन किया है, तो तय समय सीमा के बाद फरलो पाना उसका एक कानूनी अधिकार बन जाता है।
- सजा की अवधि: पैरोल या फरलो पर बाहर रहने का मतलब सजा से मुक्ति नहीं है। समय सीमा पूरी होने पर कैदी को वापस जेल में समर्पण करना पड़ता है।
2. अस्थायी रिहाई की प्रक्रिया और मंजूरी देने वाली संस्थाएं
कई लोगों को लगता है कि हर बार अदालत ही कैदी को रिहा करती है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रक्रिया है:
- जेल प्रशासन जांच: सबसे पहले जेल प्रशासन कैदी का ‘जेल रिकॉर्ड’ और उसका व्यवहार चेक करता है।
- पुलिस और स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट: कैदी जिस क्षेत्र (जैसे सिरसा) में जा रहा है, वहां के जिला प्रशासन और पुलिस से रिपोर्ट मांगी जाती है कि उसके बाहर आने से कानून-व्यवस्था (Law & Order) की स्थिति खराब तो नहीं होगी।
- सक्षम अधिकारी की स्वीकृति: सभी स्तरों से अनापत्ति (NOC) मिलने के बाद सक्षम प्राधिकारी (मंडलायुक्त या जेल विभाग का सक्षम अधिकारी) रिहाई को मंजूरी देता है।
3. राम रहीम के मामलों की वर्तमान स्थिति
राम रहीम की कानूनी स्थिति को समझने के लिए उसके मामलों का ब्योरा नीचे दिया गया है:
| मामला / अपराध | अदालत का फैसला / स्थिति | वर्तमान स्थिति |
| दो महिला शिष्याओं से दुष्कर्म | 2017 में 10-10 साल की सजा (कुल 20 साल) | सजा लागू (जेल में) |
| पत्रकार राम चंदर छत्रपति हत्या | मार्च 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बरी | बरी (अपील प्रक्रियाधीन) |
| रणजीत सिंह हत्या मामला | 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बरी | बरी |
4. विवाद और राजनीतिक क्रोनोलॉजी
Ram Rahim Parole” राम रहीम की रिहाई पर मुख्य विवाद उसकी रिहाई की क्रोनोलॉजी और टाइमिंग को लेकर उठते रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में उसके बड़े समर्थक आधार (Follower Base) के कारण राजनीतिक दल चुनाव के समय उसे लाभ पहुंचाते हैं:
- फरवरी 2022: पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले रिहाई।
- अक्टूबर 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव के ऐन वक्त पहले पैरोल।
- प्रारंभिक 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान अस्थायी रिहाई।
- अगस्त 2026: 21 दिन की फरलो पर 17वीं बार बाहर।
Ram Rahim Parole: सरकारी पक्ष और समर्थकों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी नियमों के तहत होती है और यदि कैदी पात्रता की शर्तें पूरी करता है, तो सिर्फ उसके अतीत या जनसमर्थन के आधार पर उसका कानूनी अधिकार नहीं छीना जा सकता। राम रहीम की 21 दिन की यह फरलो जेल मैनुअल और कैदी पुनर्वास नीतियों के तहत मिली एक कानूनी सुविधा है। हालांकि, इतने गंभीर मामलों में सजायाफ्ता कैदी की बार-बार रिहाई कानून के प्रावधानों, प्रशासनिक विवेक और जनता के भरोसे के बीच एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। 21 दिन की अवधि पूरी होने के बाद राम रहीम को पुनः सुनारिया जेल में आत्मसमर्पण करना होगा।








