Nepal Floods: नेपाल में विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के कारण सीमा पार भारत के उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में भारी संकट पैदा हो गया है, जिसके जवाब में उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 घंटे निगरानी के साथ हाई अलर्ट जारी किया है और कई राज्यों ने आपातकालीन हेल्पलाइन सक्रिय कर दी हैं।
नेपाल के रसुवा जिले में चीनी (तिब्बत) सीमा के पास भोटेकोशी नदी में आई इस अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया है, जिससे 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। यह जलप्रलय अब डाउनस्ट्रीम में स्थित भारतीय राज्यों के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस गंभीर स्थिति पर लगातार नज़र रख रही हैं।
Nepal Floods: बादल फटने से भोटेकोशी में सैलाब, 100 से अधिक भारतीय लापता
यह आपदा 26 अगस्त 2026 को तिब्बती पठार से निकलने वाली सीमापारीय भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) में पानी के अचानक बढ़े स्तर और बादल फटने के कारण शुरू हुई। नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धाडिंग जिलों में सड़कों और 19 महत्वपूर्ण पुलों समेत कई जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। नेपाल और चीन को जोड़ने वाला ऐतिहासिक ‘फ्रेंडशिप ब्रिज’ भी इस सैलाब में बह गया है। आपदा के समय कई विदेशी और भारतीय पर्यटक वहां मौजूद थे। लापता लोगों में 100 से अधिक भारतीय तीर्थयात्री और पर्यटक शामिल हैं, जो मुख्य रूप से तिब्बत में माउंट कैलाश की यात्रा पर जा रहे थे।
उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट और 24 घंटे की निगरानी
नेपाल की भोटेकोशी नदी आगे चलकर त्रिशूली नदी में मिलती है, जो भारत की सीमा में प्रवेश करते ही गंडक और नारायणी नदी का रूप ले लेती है। इसी खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के सीमावर्ती जिलों को सर्वोच्च सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। यूपी के राहत आयुक्त कार्यालय ने लखनऊ में एक विशेष टीम तैनात की है, जो जमीनी स्तर पर 24 घंटे लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है। (Nepal Floods)
महाराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया और गोरखपुर जैसे सीमावर्ती जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वाल्मीकि नगर बैराज और गंडक-नारायणी नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि पर सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन सायरन बजाकर लोगों को सावधान कर रहे हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की कुल 18 टीमों को सीमा पर राहत अभियानों के लिए तैनात किया गया है। जमीनी घटनाक्रम पर नजर रखने तथा नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिवारों की सहायता के लिए राज्य के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1070 के माध्यम से कर्मियों की एक समर्पित टीम तैनात की है।
हेल्पलाइन 1070 पर आईं 10 कॉल, यूपी में फिलहाल बाढ़ का तत्काल खतरा नहीं: यूपी राहत आयुक्त
तैयारियों के बारे में जानकारी देते हुए, यूपी राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने कहा कि हेल्पलाइन 1070 पर अब तक 10 कॉल प्राप्त हुए हैं, जिनमें उन व्यक्तियों ने जानकारी दी है जिनका नेपाल यात्रा पर गए परिवार के सदस्यों से संपर्क टूट गया है।
यशोद ने बताया, “फिलहाल, उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के लिए तत्काल किसी खतरे की कोई रिपोर्ट नहीं है, लेकिन स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। यह घटना नेपाल की उत्तरी सीमा पर चीन से सटी हुई है। वहां से नीचे की ओर बह रहे बाढ़ के पानी से खतरे की आशंका थी। हालांकि, कल रात से स्थिति पर नजर रखने पर पता चला है कि जलस्तर खतरे के निशान को पार नहीं किया है, जैसा कि पहले अनुमान लगाया गया था। नेपाल में बचाव अभियान सक्रिय रूप से चल रहे हैं और भारत सरकार भी राहत और बचाव कार्यों में सहयोग दे रही है।” (Nepal Floods)
उन्होंने बताया, “जुलाई में हमने कुशीनगर, महाराजगंज और देवरिया जिलों में 2 लाख क्यूसेक पानी के प्रवाह को संभाला था, और तब भी यहाँ बाढ़ की स्थिति गंभीर नहीं हुई थी। फिलहाल, वाल्मीकि बैराज से लगभग 1 लाख क्यूसेक पानी बह रहा है, जिससे कोई खतरा नहीं है।”
गंडक-नारायणी के जलस्तर पर 24 घंटे नजर, सीमावर्ती जिले हाई अलर्ट पर
राज्य प्रशासन सीमावर्ती जिलों, विशेष रूप से महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहा है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तुरंत निवारक उपाय किए जा सकें।सीमावर्ती प्रशासन को उच्च सतर्कता पर रखते हुए यशोद ने कहा, “नेपाल में हुई त्रासदी को देखते हुए, तीनों सीमावर्ती जिले उच्च सतर्कता पर हैं। हमने रात भर जलस्तर और बांधों की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी। साथ ही, हम नेपाल की ओर के बांधों और तटबंधों के बारे में भी लगातार जानकारी जुटा रहे थे। इसलिए फिलहाल बाढ़ का कोई तत्काल खतरा नहीं है। अगर बाढ़ का पानी आता भी है, तो सभी जिलों में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से तैयार है और नागरिकों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।” (Nepal Floods)
नेपाल में बाढ़ से 175 मौतें, 28 देशों के 476 लोग अब भी लापता
नेपाल में भोटे कोशी नदी में आए भीषण उफान के कारण विनाशकारी बाढ़ आई है, जिससे जानमाल का नुकसान हुआ है, लोग विस्थापित हुए हैं और घरों, सड़कों, पुलों और बिजली सुविधाओं सहित बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। नेपाल दूतावास के सूत्रों के अनुसार, अब तक 175 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों सहित कई लोग अभी भी लापता हैं। 28 देशों के लगभग 476 लोगों के लापता होने की सूचना है, हालांकि खोज और बचाव अभियान जारी रहने के कारण इन आंकड़ों की अभी भी पुष्टि की जा रही है।









