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Ram Mandir Donation Theft Case: 30 बैंक लॉकरों की फोरेंसिक जांच पूरी, चंपत राय की वापसी की चर्चाओं के बीच आ सकती है एसआईटी रिपोर्ट!

Ram Mandir Donation Theft Case

Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के भव्य राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले में जांच अब अपने अंतिम और बेहद महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (SIT) की टीम अब केवल कागजी रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं है, बल्कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े 30 बैंक लॉकरों में रखे सामान की फोरेंसिक जांचकर रही है।

जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल प्रमाण के रूप में सुरक्षित रखने के लिए हर लॉकर को खोलने, उसमें रखे कीमती सामान, धातु और आभूषणों की गिनती तथा उनकी भौतिक स्थिति की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड्स को पेन ड्राइव में सुरक्षित कर सितंबर के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किए जाने की संभावना है।

एसआईटी जांच और 30 बैंक लॉकरों का सत्यापन

एसआईटी की इस व्यापक जांच का मुख्य उद्देश्य ट्रस्ट के रजिस्टरों में दर्ज Entries और लॉकरों में वास्तव में मौजूद सामान के बीच के अंतर का पता लगाना है।

  • डिजिटल और फोरेंसिक प्रमाण: लॉकरों में मिले सामान का मिलान मंदिर के आधिकारिक दान रजिस्टर से किया जा रहा है।
  • पारदर्शिता हेतु रिकॉर्डिंग: पूरी फोरेंसिक प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है, ताकि अदालत में पुख्ता सबूत प्रस्तुत किए जा सकें।
  • सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट: सूत्रों के अनुसार, जांच दल सितंबर 2026 के प्रथम सप्ताह में अपनी अंतिम रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंप सकता है।

पूर्व महासचिव चंपत राय की सक्रियता और वापसी पर विवाद

आगामी 2 सितंबर को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक उच्च स्तरीय बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक से ठीक पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की अयोध्या में बढ़ी सक्रियता ने उनके दोबारा प्रशासनिक भूमिका में लौटने की चर्चाओं को बल दिया है। चंपत राय ने जून 2026 में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था।

पदाधिकारी / व्यक्तिवर्तमान स्थितिमुख्य बिंदु व दावे
चंपत रायपूर्व महासचिव, ट्रस्टएसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में सीधी संलिप्तता न मिलने का दावा; समर्थकों द्वारा वापसी की मांग।
महिपाल सिंहपूर्व लेखा प्रभारी23 अगस्त को ट्रस्ट अध्यक्ष को ईमेल भेजकर चंपत राय की वापसी का विरोध; दान व सीसीटीवी रिकॉर्ड्स पर सवाल।
नृपेंद्र मिश्रअध्यक्ष, निर्माण समिति9-पेज के कथित विवादित नोट को खारिज कर मनगढ़ंत करार दिया।

पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के गंभीर आरोप

Ram Mandir Donation Theft Case: ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और कार्यकारिणी को पत्र लिखकर चंपत राय को पुनः कोई बड़ी जिम्मेदारी न देने की अपील की है।

  1. कैश काउंटिंग में अनियमितता: उन्होंने आरोप लगाया कि दान और चढ़ावे की गिनती वाले कक्ष (Counting Room) में अनधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी थी।
  2. लागत में भारी वृद्धि: उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत जो पहले लगभग ₹800 करोड़ बताई गई थी, वह बढ़कर करीब ₹2200 करोड़ तक पहुंच गई, जिसका पारदर्शी हिसाब होना चाहिए।
  3. दान रसीदें और भू-खंड मामला: महिपाल सिंह ने वित्तीय रसीदों और पूर्व में खरीदी गई जमीनों के लेन-देन पर भी सवाल उठाए हैं। (हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।)

ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और नए सीईओ की तलाश

सितंबर की बैठक में ट्रस्ट के अंदरूनी प्रबंधन को लेकर बड़े रणनीतिक फैसले लिए जा सकते हैं। मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने सांगठनिक चेहरों (जैसे वीएचपी व चंपत राय) के स्थान पर अब एक प्रोफेशनल Administrative Setup लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

  • Retired Bureaucrat को कमान: खाली पड़े सीईओ (CEO) पद के लिए किसी वरिष्ठ पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के नाम पर चर्चा चल रही है।
  • दैनिक प्रशासन में बदलाव: नया सीईओ नियुक्त होने से मंदिर के रोजाना के प्रबंधन और वित्तीय संचालन में सरकारी अनुभव वाले अधिकारियों का प्रभाव बढ़ सकता है।

2-3 सितंबर की बैठक और कानूनी निर्णय पर टिकीं निगाहें

अयोध्या राम मंदिर का यह प्रकरण अब केवल चढ़ावा चोरी की जांच तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह वित्तीय पारदर्शिता, ट्रस्ट के आंतरिक प्रबंधन और भावी प्रशासनिक ढांचे से जुड़ गया है। जहां विपक्षी दल और स्थानीय संत एसआईटी की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं, वहीं समर्थकों का तर्क है कि बिना प्रत्यक्ष सबूत के किसी पर आरोप लगाना अनुचित है।

अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट और 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि मंदिर प्रशासन की कमान किसी नए प्रशासनिक चेहरे को मिलेगी या पुराने पदाधिकारियों की वापसी होगी।

Khushi Tiwari
Author: Khushi Tiwari

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