Ladakh Violence: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लद्दाख की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां के लोग वोट देने का अधिकार और अपनी सरकार चुनने का अधिकार मांग रहे हैं, लेकिन भाजपा उनकी आवाज दबा रही है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता के नशे में चूर होकर राज्यों को केंद्र शासित प्रदेश बना रही है और संविधान प्रदत्त अधिकार छीन रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना हर भारतीय का फर्ज है और लद्दाख के लोग केवल अपने हक की मांग कर रहे हैं। (Ladakh Violence)
अरविंद केजरीवाल का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब एक दिन पहले ही लद्दाख में हिंसा भड़क उठी और इसमें चार लोगों की जान चली गई। लद्दाख के लोग पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
Ladakh Violence: अरविंद केजरीवाल का बयान
सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में केजरीवाल ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता के नशे में चूर है और एक के बाद एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदल रही है तथा संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को छीन रही है।
पोस्ट में लिखा, “लद्दाख में आज जो कुछ हो रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। हर सच्चे देशभक्त को लद्दाख के लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए। क्या हमने अंग्रेजों से आजादी सिर्फ इसलिए ली थी कि जनता अंग्रेजों की बजाय भाजपा की गुलाम बन जाए?
भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने लोकतंत्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी ताकि हर भारतीय को अपनी सरकार चुनने का अधिकार मिले। लेकिन आज सत्ता के नशे में चूर भाजपा एक के बाद एक राज्यों को केंद्र शासित प्रदेश में बदल रही है और संविधान प्रदत्त अधिकारों को छीन रही है।”
केजरीवाल ने अपने पोस्ट में आगे आरोप लगाया कि भाजपा लद्दाख के लोगों की आवाज को दबा रही है और बार-बार वादे करने के बावजूद लोगों को वोट देने का अधिकार नहीं दे रही है। देश में तानाशाही की मौजूदगी पर जोर देते हुए केजरीवाल ने लोगों से लोकतंत्र की लड़ाई में सरकार के खिलाफ बोलने का आग्रह किया।
पोस्ट में आगे लिखा, “लद्दाख के लोग क्या मांग रहे हैं? वे बस वोट देने का अधिकार, अपनी सरकार चुनने का अधिकार मांग रहे हैं। लेकिन भाजपा उनकी आवाज़ दबा रही है। बार-बार वादा करने के बावजूद, वह उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं दे रही है। (Ladakh Violence)
लोकतंत्र लोगों की आवाज़ है और जब सरकार उसी आवाज़ को दबाने लगे, तो लोगों का फ़र्ज़ बनता है कि वे और ज़ोर से बोलें। अगर हमें देश के लोकतंत्र को बचाना है, तो हम इस तानाशाही के ख़िलाफ़ अब और चुप नहीं रह सकते। आज लद्दाख की लड़ाई कल पूरे देश की लड़ाई बन सकती है।”
लद्दाख के उपराज्यपाल ने उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की
इस बीच, लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने गुरुवार को एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थिति का आकलन किया गया।
ये प्रदर्शन हिंसक हो गए और पुलिस के साथ झड़पें हुईं। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कड़ी सतर्कता, मजबूत अंतर-एजेंसी समन्वय और सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
Ladakh Violence: लद्दाख की स्थिति
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर लद्दाख में आंदोलन चल रहा है, जो बुधवार को हिंसक हो गया। ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) के नेतृत्व वाला आंदोलन तब हिंसक हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय और कई वाहनों में आग लगा दी और सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए।
लद्दाख की राजधानी में पूर्ण बंद के बीच आग की लपटें और काला धुआं देखा जा सकता था। अधिकारियों ने बताया कि लेह में हिंसक झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। (Ladakh Violence)
प्रशासन ने लद्दाख के लेह जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। निषेधाज्ञा के तहत पांच या इससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।









