UP Politics: ‘गोरखपुर में BJP के अंदर वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है’, अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना आयुष्मान खुराना को लॉरेंस गैंग के नाम पर धमकी, मांगी करोड़ों की रंगदारी; मुंबई पुलिस जांच में जुटी त्योहारों से पहले दिल्ली सरकार की बड़ी कार्रवाई, मोरी गेट खोया मार्केट में छापा; 7 हजार किलो खोया किया गया नष्ट Delhi Air Pollution: एक बार फिर गैस चैंबर बनी देश की राजधानी, दिल्ली का AQI 400 के पास पहुंचा; सांस लेना हुआ मुश्किल ‘…तब नतीजे कुछ और होते’: अमेरिका मिडटर्म चुनाव में खराब प्रदर्शन पर डोनाल्ड ट्रंप का पहला बयान कौन हैं कीशा लांस बॉटम्स? अमेरिका की पहली अश्वेत महिला गवर्नर बनीं, जानें उनका राजनीतिक सफर
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UP Politics: ‘गोरखपुर में BJP के अंदर वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है’, अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना

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UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर एक बार फिर बेहद पैने हो चुके हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने गोरखपुर में भाजपा के अंदर चल रही कथित खींचतान को लेकर सवाल उठाए। साथ ही, भगवान श्रीकृष्ण के पवित्र नाम ‘रणछोड़’ का गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर भाजपा नेताओं की सोच पर भी नाराजगी जताई।

UP Politics: अखिलेश यादव का भाजपा पर निशाना, गोरखपुर की अंदरूनी कलह पर कसा तंज

अखिलेश यादव ने अपने बयान में सीधे तौर पर दावा किया कि गोरखपुर के भीतर भाजपा की आंतरिक कलह और वर्चस्व की लड़ाई अब पूरी तरह खुलकर सामने आ चुकी है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर तंज कसते हुए लिखा कि जो लोग पड़ोसियों से अपने खुद के टिकट तक पक्के नहीं करवा पाते, उन्हें दूसरों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए, बशर्ते वे समाज में अपना सम्मान बचाए रखना चाहते हों।

उन्होंने लिखा, “उन्होंने जो मज़ाक उड़ाए हैं, वे किसी ‘गुस्सैल’ इंसान की बातों से प्रेरित लगते हैं। भगवान कृष्ण के दूसरे महान नाम ‘रणछोड़’ का गलत मतलब में इस्तेमाल करके, उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उनका ज्ञान समाज के लिए कितना सीमित, छोटी सोच वाला और खतरनाक है।”

अखिलेश के बयान पर भाजपा का पलटवार

यह विवाद तब शुरू हुआ, जब अखिलेश यादव ने घोषणा की कि वे आगामी 2027 का विधानसभा चुनाव खुद उम्मीदवार के तौर पर नहीं लड़ेंगे, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस बयान पर पलटवार करते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव को ‘रणछोड़’ करार दे दिया। बस इसी बयान के बाद यूपी की राजनीति में एक नया सियासी संग्राम खड़ा हो गया। (UP Politics)

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा प्रमुख पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव चुनाव लड़ने से डर रहे हैं। उन्होंने कहा, “पहले तो वे बड़ी-बड़ी चुनौतियां देते थे, लेकिन अब मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए हैं। उत्तर प्रदेश की जनता अब ‘रणछोड़’ नेताओं को नहीं, बल्कि मैदान में डटकर खड़े रहने वालों को चुनती है।” भाजपा का तर्क है कि लोकतंत्र में जनता के बीच जाकर वोट मांगे बिना सीधे मुख्यमंत्री बनने का सपना देखना हास्यास्पद है।

‘रणछोड़’ नाम पर अखिलेश ने भाजपा को घेरा, श्रीकृष्ण का दिया उदाहरण

भाजपा के इसी तंज पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के इस नाम के गलत इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा, “ये जो जुबानी तीर छोड़े जा रहे हैं, ऐसा लगता है कि वे किसी ‘चिड़चिड़े’ व्यक्ति के शब्दों से प्रेरित हैं। भगवान कृष्ण के महान और पवित्र नाम ‘रणछोड़’ का नकारात्मक अर्थ में इस्तेमाल करके उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उनका ज्ञान कितना सीमित, संकीर्ण और समाज के लिए खतरनाक है।” (UP Politics)

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को ‘रणछोड़’ नाम तब मिला था, जब उन्होंने मगधराज जरासंध और कालयवन के साथ युद्ध के दौरान समय की मांग और मथुरा की जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रणभूमि छोड़ दी थी। यह नाम उनकी कायरता का नहीं, बल्कि उनकी कूटनीति, जन-कल्याण की भावना और युद्ध कौशल का प्रतीक है। अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए आरोप लगाया कि पार्टी को भारतीय संस्कृति और इतिहास की पूरी जानकारी नहीं है।

2027 के महामुकाबले की बिसात

अखिलेश यादव के इस आक्रामक रुख से साफ है कि समाजवादी पार्टी आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है। अखिलेश ने जोर देकर कहा कि राज्य में समाजवादी पार्टी की वापसी तय है और सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार में लिप्त सभी लोगों को जनता की अदालत के सामने खड़ा किया जाएगा।

इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा समर्थकों और नेताओं का कहना है कि विपक्ष अपनी संभावित हार को देखते हुए पहले से ही बहाने तलाश रहा है और व्यक्तिगत हमलों पर उतर आया है। बहरहाल, ‘रणछोड़’ शब्द को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब महज एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं रह गया है, बल्कि इसने यूपी की सियासत में सांस्कृतिक ज्ञान और अंदरूनी गुटबाजी के एक नए मोर्चे को खोल दिया है। (UP Politics)

Vaishali
Author: Vaishali

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