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CJI BR Gavai पर Attack की कोशिश, SC के अंदर जूता फेंकने वाला वकील कौन? जानें क्या है पूरा मामला

CJI BR Gavai

CJI BR Gavai: सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर हमला करने का प्रयास किया। वकील ने कोर्ट रूम में एक जूता फेंकने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत पकड़ लिया। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों द्वारा बाहर निकाले जाने के दौरान हमलावर ने “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” के नारे भी लगाए। यह घटना उस समय हुई जब मुख्य न्यायाधीश एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। हमलावर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में सुरक्षा का उल्लंघन

यह घटना सुबह करीब 11:35 पर हुई। यह घटना उस समय घटी जब कोर्ट नंबर एक में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ वकीलों द्वारा उल्लेख किए गए मामलों की सुनवाई कर रही थी। वकील मंच के पास पहुंचा, अपना जूता निकाला और उसे सीजेआई की ओर फेंकने की कोशिश की। अदालत कक्ष में मौजूद सतर्क सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और हमले को रोका।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही (CJI BR Gavai)

वकील को तुरंत अदालत परिसर से बाहर ले जाया गया। जूता फेंकने की नाकाम कोशिश के बाद ‘सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान’ का नारा लगाने वाले राकेश किशोर दिल्ली के मयूर विहार इलाके के निवासी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक राकेश किशोर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पंजीकृत सदस्य हैं। घटना के बाद सीजीआई ने अपना संयम बनाए रखा और अदालत कक्ष में उपस्थित वकीलों से अपनी दलीलें जारी रखने का आग्रह किया।

हमलावर वकील की पहचान

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस बी.आर. गवई पर जूता उछालने की कोशिश करने के आरोप में वकील राकेश किशोर को हिरासत में ले लिया है। राकेश किशोर, जो कि 71 वर्ष के हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

बताया गया है कि राकेश किशोर, खजुराहो के मंदिरों से जुड़ी एक टिप्पणी को लेकर सीजेआई गवई से नाराज़ थे। दिल्ली पुलिस ने आरोपी से तीन घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई शिकायत दर्ज न होने पर, वकील को रिहा कर दिया गया। (CJI BR Gavai)

भगवान विष्णु की मूर्ति मामले की सुनवाई

भगवान विष्णु की मूर्ति मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गवई ने टिप्पणी की थी कि मूर्ति को पुनर्स्थापित करने के लिए निर्देश मांगने वाले याचिकाकर्ता को भगवान विष्णु से प्रार्थना करके उपाय तलाशना चाहिए, क्योंकि न्यायालय ने इस पर विचार करने से इनकार कर दिया था।

मामले की सुनवाई से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि यह एक मंदिर पर विवाद है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत एक संरक्षित स्मारक है, और सुझाव दिया कि इस संबंध में हस्तक्षेप करने के लिए एएसआई एक बेहतर प्राधिकारी है।

उनकी टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं आने पर मुख्य न्यायाधीश गवई ने स्पष्ट किया कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ के लंच के बाद के सत्र के दौरान आई। (CJI BR Gavai)

वकीलों का एकजुट होना और कार्रवाई की मांग

अदालत में मौजूद भारत के सॉलिसिटर जनरल (एसजीआई) तुषार मेहता ने कहा कि वह पिछले दस सालों से मुख्य न्यायाधीश को जानते हैं और उन्हें पता है कि मुख्य न्यायाधीश सभी धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। मेहता ने आगे कहा कि आजकल सोशल मीडिया पर बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के पूर्व सचिव एडवोकेट रोहित पांडे ने इस कृत्य की निंदा की और वकील के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ता रोहित पांडे ने कहा कि अगर किसी वकील ने अदालत कक्ष के अंदर हमले का प्रयास किया है तो यह एक दुखद घटना है। मैं इसकी निंदा करता हूं। मुझे पता चला कि वह बार का सदस्य था और उसने माननीय सीजेआई द्वारा भगवान विष्णु पर की गई टिप्पणी के बाद यह जानकारी दी। अगर यह सच है, तो कार्रवाई की जानी चाहिए। (CJI BR Gavai)


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