Indian Railways:ने रेलवे परिचालन से संबंधित भ्रामक वीडियो शेयर करने वाले सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है। इस कदम के तहत, रेलवे अधिकारियों ने 20 से ज़्यादा सोशल मीडिया हैंडलों की पहचान की है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
रेलवे ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर नजर रखने के लिए एक 24/7 निगरानी तंत्र स्थापित किया है, जो फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर वायरल सामग्री की जांच करता है। रेलवे ने पाया कि त्योहारी सीजन के दौरान, कुछ हैंडल भीड़ या अन्य घटनाओं के पुराने और भ्रामक वीडियो प्रसारित कर रहे थे, जिससे यात्रियों में अनावश्यक रूप से घबराहट फैल रही थी।
Indian Railways ने कहा कि इस त्योहारी सीजन के दौरान कुछ सोशल मीडिया हैंडल पुराने या भ्रामक वीडियो प्रसारित कर रहे हैं, जिससे यात्रियों में भ्रम पैदा हो रहा है। रेलवे प्रशासन ने बताया कि ऐसे 20 से ज़्यादा सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर ली गई है और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऐसे असामाजिक तत्वों पर कड़ी नज़र रखने के लिए 24×7 सोशल मीडिया निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।
Indian Railways: प्रशासन की अपील
रेलवे ने सभी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे तथ्यों की पुष्टि किए बिना स्टेशनों पर भीड़ या अन्य घटनाओं के वीडियो साझा करने से बचें। यात्रियों से आग्रह है कि वे प्रामाणिक जानकारी के लिए केवल रेलवे की आधिकारिक अधिसूचनाओं और रेल मंत्रालय के सत्यापित सोशल मीडिया हैंडलों, जैसे @RailMinIndia, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर ही भरोसा करें।
इससे पहले 16 अक्टूबर को रेलवे बोर्ड के महानिदेशक सुरक्षा, हरि शंकर वर्मा ने कहा था कि Indian Railways परिचालन सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी नवाचार के साथ-साथ डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जब आप पीआरएस पर जाते हैं, तो कुछ डेटा डालते हैं, और आपको पता चलता है कि दुनिया भर के लोग हमसे बात कर रहे हैं। इसलिए हमारे पास बहुत सारा डेटा है।
रेलवे सूचना प्रणाली केन्द्र (सीआरआईएस) Indian Railways यात्रियों के इस विशाल डिजिटल बुनियादी ढांचे का प्रबंधन करने वाली नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है, जिसका उपयोग वे टिकट बुक करते समय करते हैं। उन्होंने कहा कि कई कंपनियाँ ऐसा कर रही हैं, और हमारी नोडल एजेंसी क्रिस है। हर भारतीय को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि 38 साल पहले जब कंप्यूटर टिकट छपने लगे थे, तब रेलवे में कंप्यूटरीकरण की शुरुआत हुई थी। कंप्यूटर के बिना आरक्षण के बारे में सोचिए, आप सोच भी नहीं सकते। यही भारत की तकनीकी और डिजिटल पहचान है।









