Baba Ramdev: योग गुरु और पतंजलि आयुर्वेद के सह-संस्थापक बाबा रामदेव सनातन धर्म के नाम पर जातिगत भेदभाव की प्रथा की आलोचना करते हुए कहा कि यह सनातनी संस्कृति नहीं बल्कि तनातनी संस्कृति है।
न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में रामदेव (Baba Ramdev) ने कहा कि बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म का केंद्रीय विचार एक वैज्ञानिक स्वभाव का प्रतीक है। यह इस विश्वास को दर्शाता है कि सर्वोच्च ईश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को जाति की परवाह किए बिना, क्षमताओं से संपन्न किया है और इन क्षमताओं का उपयोग देश को महान बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
बाबा रामदेव (Baba Ramdev) ने कहा कि सनातन धर्म, तार्किक, दार्शनिक और मत-बोध के अनुसार एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखता है और यह एक दृष्टिकोण है कि आपके भीतर, जाति या भेदभाव के बिना सर्वोच्च ईश्वर ने आपको पूर्ण क्षमताएं दी हैं, इसलिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाएं और देश को महान बनाने के लिए अपना सर्वस्व लगा दें, यही सनातन धर्म का केंद्रीय विचार है। सनातन धर्म के नाम पर जो भी भेदभाव चल रहा है, वह “सनातनी संस्कृति” नहीं बल्कि “तनातनी संस्कृति” है।

Baba Ramdev: रामदेव ने कांग्रेस पर साधा निशाना
रामदेव (Baba Ramdev) ने सनातन मूल्यों का बचाव किया और भारत की सांस्कृतिक जड़ों को विभाजित करने की कोशिश करने वालों को चेतावनी दी। रामदेव ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को राजनीतिक रूप से हराने में विफल रही।
रामदेव ने कहा कि आर्य समाज की तरह आरएसएस भी एक राष्ट्रवादी संगठन है और इसके भीतर डॉ. हेडगेवार से लेकर सदाशिवराव गोलवलकर तक अनेक महापुरुषों ने तपस्या की है। आज भी संघ के लाखों कार्यकर्ता देश के लिए काम करते हैं। जब राष्ट्रविरोधी ताकतें, सनातन विरोधी ताकतें आरएसएस या किसी भी हिंदुत्ववादी ताकत का विरोध करती हैं, तो इसके पीछे उनका कोई छिपा हुआ एजेंडा और स्वार्थ होता है।
रामदेव (Baba Ramdev) की यह टिप्पणी उस विवाद के बाद आई है जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल के 1948 के आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का हवाला देने और यह तर्क देने के बाद फिर से भड़क गया था कि यह संगठन कानून और व्यवस्था की समस्याओं के लिए जिम्मेदार है।









