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दहशत में बांग्लादेश! पहले सियासत की आग, फिर हिंसा का तांडव… और अब कुदरत का ‘भूकंपी’ प्रहार!

जिस देश की धरती महीनों से सियासी उथल-पुथल और खून-खराबे से कांप रही थी, आज वहां की जमीन सचमुच डोल गई! बांग्लादेश, जो पहले से ही आंतरिक कलह और हिंसा की आग में झुलस रहा है, आज सुबह 3.9 तीव्रता के भूकंप के झटकों से थर्रा उठा। ऐसा लगता है मानो कुदरत भी इस अशांत राष्ट्र को कोई खौफनाक चेतावनी दे रही है।

​एक तरफ ढाका की सड़कों पर राजनीतिक गुटों के बीच खूनी संघर्ष की खबरें थमने का नाम नहीं ले रही हैं, वहीं दूसरी तरफ आज सुबह 6 बजकर 13 मिनट पर आए भूकंप ने लोगों को घरों से बाहर भागने पर मजबूर कर दिया। 10 किलोमीटर की गहराई में उठा यह कंपन मामूली हो सकता है, लेकिन ‘अशांति के दौर’ से गुजर रहे बांग्लादेशियों के लिए यह किसी कयामत के साये से कम नहीं था।

बांग्लादेश में 3.9 तीव्रता का भूकंप
शुक्रवार शाम बांग्लादेश में 3.9 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप शाम 6 बजकर 13 मिनट पर आया। इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था। एनसीएस ने बताया कि भूकंप का केंद्र बांग्लादेश में 22.07 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 92.51 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। भूकंप के झटके हल्के थे, लेकिन कई इलाकों में लोगों ने कंपन महसूस किया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।

बांग्लादेश में अशांति का माहौल

​बीते कुछ दिनों में जिस तरह से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले, आगजनी और लिंचिंग की घटनाओं ने सुर्खियां बटोरी हैं, उसने पूरे देश को ‘डर के पिंजरे’ में कैद कर दिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बांग्लादेश तीन बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन पर स्थित है। जहां एक तरफ समाज में नफरत और विभाजन की दरारें चौड़ी हो रही हैं, वहीं जमीन के नीचे बढ़ता दबाव किसी बड़े भूगर्भीय खतरे की ओर इशारा कर रहा है।

हाथों में मशालें लिए उपद्रवी, धुएं से भरा आसमान, और अब हिलती हुई इमारतें… बांग्लादेश आज एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहाँ उसे ‘मानवीय नफरत’ और ‘कुदरती कहर’ दोनों से एक साथ लड़ना पड़ रहा है।

​सावधान! यह सिर्फ झटके नहीं हैं, यह उस अस्थिरता का ट्रेलर है जिसने दक्षिण एशिया के इस महत्वपूर्ण देश को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। क्या मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार इस ‘दोहरे तूफान’ को थाम पाएगी? या फिर हड़कंप की यह गूंज और गहरी होती जाएगी?

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