आज कांग्रेस वर्किंग कमिटी(CWC) की बैठक आज संपन्न हुई। जिसमें आज काफी लंबे अंतराल के बाद सासंद शशि थरूर भी शामिल हुए। जो कि पहले कई बैठक से नदारत रहे। बैठक समाप्त होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बीजेपी पर मनरेगा को लेकर भी तंज कसै है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। बैठक की शुरुआत में उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के अधिकारों पर चारों तरफ गंभीर संकट छाया हुआ है, और ऐसे समय में कांग्रेस को भविष्य की ठोस रणनीति बनानी होगी। उन्होंने मनरेगा, आगामी विधानसभा चुनावों, एसआईआर, केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले की भी निंदा की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान
“हाल में संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार ने मनरेगा को समाप्त कर करोड़ों गरीबों और कमजोर तबके के लोगों को बेसहारा कर दिया है। गरीबों के पेट पर लात मारने के साथ उनकी पीठ में मोदी सरकार ने छुरा घोंपा है। मोदी सरकार ने काम के अधिकार पर सुनियोजित और क्रूर हमला किया है।”

‘मोदी सरकार को गरीबों की चिंता नहीं’
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार को गरीबों की चिंता नहीं, बल्कि चंद बड़े पूंजीपतियों के मुनाफ़े की ही चिंता है। उनका कहना था कि मनरेगा यूपीए सरकार का ऐसा दूरदर्शी कदम था, जिसे पूरे विश्व ने सराहा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “इस योजना ने ग्रामीण भारत का चेहरा बदला। यह विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम बना। इससे पलायन रुका, गांवों को अकाल, भूख, और शोषण से मुक्ति मिली। इस योजना ने दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मज़दूरों को भरोसा दिया कि गरीबी से जंग में सरकार उनके साथ खड़ी है।”

मनरेगा की कब से हुई शुरूआत को लेकर सुनाई कहानी
अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार को गरीबों की नहीं, बल्कि कुछ बड़े पूंजीपतियों के मुनाफे की चिंता है. उन्होंने याद दिलाया कि मनरेगा की शुरुआत 2 फरवरी 2006 को आंध्र प्रदेश के बंडलापल्ली में हुई थी और इस योजना ने ग्रामीण भारत का चेहरा बदल दिया. इससे पलायन रुका, गांवों को अकाल और भूख से राहत मिली और दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों को सुरक्षा मिली।
खड़गे ने कहा कि बिना किसी अध्ययन और परामर्श के मनरेगा को खत्म करना वैसा ही है, जैसा तीन काले कृषि कानूनों के साथ किया गया था. उन्होंने कहा कि देशव्यापी आंदोलन के जरिए सरकार को पीछे हटने पर मजबूर किया जाएगा, जैसे भूमि अधिग्रहण कानून और कृषि कानूनों के मामले में हुआ था।
इन सबके बीच कांग्रेस बाते तो बहुत बड़ी बड़ी करती है लेकिन उस पर कितना अमल करेगी, ये देखना वाली बात होगी। क्.कि कांग्रेस की राजनीतिक हालत पिछले 2014 से लेकर बहुत अच्छी नहीं तल रही है। तो क्या इस बैठक के बाद कांग्रेस अपनी आंखें खोलेगी या फिर उसी ढर्रे पर चलती नज़र आएगी।









