“संगम की रेती पर भक्ति का रेला! जहाँ एक ओर सीएम योगी ने माघ मेले को ‘सनातन गौरव’ बताया, वहीं अखिलेश यादव ने ‘केदारेश्वर मंदिर’ की मांग कर सियासी तपिश बढ़ा दी है। आस्था के बीच उठते इन सवालों ने माघ मेला 2026 को बेहद खास बना दिया है।
पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रयागराज में ‘माघ मेला 2026’ का भव्य आगाज हो गया है। इस धार्मिक उत्सव के शुरू होते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो धुरंधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनता को अपनी शुभकामनाएं दी हैं, लेकिन दोनों के संदेशों में अपनी-अपनी विचारधारा और सियासी रंग भी साफ नजर आया।
सीएम योगी ने माघ मेला पर दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के लोगों को माघ मेले की शुभकामनाएं दी है। एक्स हैंडल पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “श्रीगङ्गादेव्यै नमः माघ मेला के शुभारंभ एवं पावन पौष पूर्णिमा की सभी श्रद्धालुओं व प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाने हेतु तीर्थराज प्रयाग पधारे सभी पूज्य साधु-संतों, धर्माचार्यों, सभी अखाड़ों एवं कल्पवासियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन। मां गंगा, मां यमुना एवं मां सरस्वती सभी के मनोरथ पूर्ण करें, यही प्रार्थना है।

अखिलेश यादव की माघ मेला पर दी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी माघ मेला पर लोगों को शुभकामना दी है। उन्होंने लिखा कि माघ मेला के पावन शुभारंभ पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रदेशवासियों को माघ मेले की बधाई दी, लेकिन साथ ही एक नई बहस छेड़ दी। उन्होंने मांग की है कि सरकार माघ मेले में ‘केदारेश्वर मंदिर’ की स्थापना करे। अखिलेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन ने ‘नेताजी’ (मुलायम सिंह यादव) की मूर्ति लगाने की अनुमति नहीं दी, जो लोकतंत्र और परंपरा के विरुद्ध है। उन्होंने तंज कसा कि यदि अधिकारी नियम बदल रहे हैं, तो वे भी भगवान की मूर्तियां वहां स्थापित करेंगे।

75 साल बाद दुर्लभ संयोग
इस बार माघ मेले का शुभारंभ 75 साल बाद बने एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग में हो रहा है, जहाँ पौष पूर्णिमा के दिन ही मेले की आधिकारिक शुरुआत हुई है। प्रशासन का अनुमान है कि 44 दिनों तक चलने वाले इस मेले में करीब 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु आएंगे।









